
पूर्णिया:-04 मई (राजेश कुमार झा)पूर्णिया सहित सात राज्यों को जोड़ने वाली 4.7 किलोमीटर लंबी एक मात्र महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु का 133 नम्बर का एक पिलर ढह गया.जिससे अब पूर्णिया से भागलपुर जाने में 8 घंटे लग जाएंगे.ये सिर्फ एक पुल ही नहीं था.इसे पूर्वी बिहार, दक्षिण बिहार सहित सात राज्यों को जोड़ने वाली लाइफ लाइन कहा जाता है.बताते चलें कि रात के एक बजे सेतु का पाया नंबर (पिलर) 133 पूरी तरह ध्वस्त होकर गंगा में समा गया.जिसके बाद सुरक्षा कारणों से पुल पर वाहनों का आवागमन अगले तीन महीनों तक पूरी तरह से बंद कर दिया गया है.घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच चुके हैं.
चेतावनी के बावजूद नहीं जागा विभाग
हैरानी की बात यह है कि पिलर संख्या 133 में खराबी की शिकायत पिछले कई दिनों से की जा रही थी. स्थानीय मीडिया द्वारा लगातार खबर दिखाए जाने और विभाग को सचेत करने के बावजूद मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया गया. प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा आज पुल के इस हिस्से के ढहने के रूप में सामने आया है.यदि समय रहते पिलर के आधार को मजबूत किया जाता,तो शायद इस बड़े संकट से बचा जा सकता था.
पुल का इतिहास और निर्माण
विक्रमशिला सेतु का निर्माण भागलपुर में गंगा नदी पर यातायात सुगम करने के लिए किया गया था.
उद्घाटन: इस पुल का उद्घाटन वर्ष 2001 में किया गया था
लागत उस समय इस महासेतु को बनाने में लगभग 160 करोड़ रुपये की लागत आई थी.
महत्व यह पुल न केवल भागलपुर बल्कि पूर्णिया, कटिहार,अररिया और नवगछिया को झारखंड व बंगाल से जोड़ने वाला प्रमुख केंद्र है.वर्तमान में पुल पर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है,ताकि किसी जान-माल का नुकसान न हो.डीएम ने तकनीकी टीम को मौके पर बुलाया है और जांच के आदेश दिए हैं.स्थानीय लोगों में विभाग के प्रति भारी आक्रोश है,क्योंकि यह पुल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है.

