बक्सर 29 अगस्त (विक्रांत) राज्य सरकार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पारंपरिक, शास्त्रीय, चाक्षुष एवं प्रदर्शन कलाओं से जुड़े वरिष्ठ कलाकारों के लिए राहत भरी पहल की है। सरकार ने 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों को आर्थिक सहायता देने हेतु “मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना” शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत पात्र कलाकारों को हर महीने तीन हजार रुपये की पेंशन दी जाएगी।

इस योजना का उद्देश्य न केवल इन कलाकारों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित रखना है। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने योजना के कार्यान्वयन को लेकर सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने जिलों को कहा है कि संबंधित कलाकारों से आवेदन आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन जारी किया जाए और इसके लिए प्रखंड और पंचायत स्तर तक प्रचार-प्रसार किया जाए।
जिलाधिकारी को योजना के सुचारु संचालन के लिए एक समीक्षा समिति के गठन का निर्देश भी दिया गया है, जो प्राप्त आवेदनों की जांच कर अपनी अनुशंसा कला संस्कृति विभाग को सौंपेगी। आवेदन प्रक्रिया के तहत कलाकारों को आवश्यक प्रमाण पत्रों के साथ अपने आवेदन जिलाधिकारी कार्यालय में जमा** करने होंगे।
बक्सर के डीएम डॉ. विद्यानंद सिंह ने भी इस योजना के सफल क्रियान्वयन को लेकर जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों, डुमरांव नगर परिषद, चौंसा, ब्रह्मपुर एवं इटाढ़ी नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना कलाकारों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देने के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने में सहायक सिद्ध होगी।
डुमरांव के एसडीओ राकेश कुमार ने बताया कि आवेदन भरने से पूर्व सभी इच्छुक कलाकारों को “बिहार कलाकार पोर्टल” पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसके पश्चात ही वे आवेदन प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। आवेदन की अंतिम तिथि और अन्य जानकारियाँ जिला स्तर पर जारी किए गए विज्ञापनों के माध्यम से साझा की जा रही हैं।
प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं कलाकारों को पेंशन दी जाएगी, जो कला के क्षेत्र में दीर्घकालिक योगदान दे चुके हैं, लेकिन वर्तमान में आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं। सरकार की यह पहल उन गुमनाम प्रतिभाओं के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है, जो वर्षों से अपनी कला के माध्यम से समाज को समृद्ध करते आ रहे हैं।
इस योजना के माध्यम से सरकार ने यह संदेश दिया है कि “कलाकार सिर्फ मनोरंजन नहीं, संस्कृति के संवाहक होते हैं,” और उनका सम्मान करना समाज की जिम्मेदारी है।

