
पूर्णिया:-26 जून(राजेश कुमार झा)बिहार के 10 सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल 282 किलोमीटर लंबा पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे,जो आने वाले समय में नेपाल सहित पूर्वोत्तर के सात राज्यों के विकास के लिए सेतु का काम करेगा.इस एक्सप्रेस वे के निर्माण से पटना से पूर्णिया की दूरी में 80 किलोमीटर की कमी होगी.यानि अभी पटना से पूर्णिया फोरलेन की तरफ यानि मुजफ्फरपुर,दरभंगा होते हुए पूर्णिया जाते है तो उसकी दूरी 360 किलोमीटर होती है.इस एक्सप्रेस वे के निर्माण से 80 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी.अभी पटना से पूर्णिया जाने में कम से कम 6 घंटे लगते है.उनकी जगह में आप महज 3 घंटे में पटना से पूर्णिया की दूरी तय कर सकेंगे.बताते चलें कि बिहार के पहले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (NE-9) को केंद्र सरकार ने वित्तीय मंजूरी प्रदान कर दी है और इस प्रकार इसके निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है.खास बात यह है कि इसका निर्माण हइब्रीड एन्यूटी मॉडल पर आधारित होगा.अनुमानित लागत के अनुसार 6 लेन के इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में 21 हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च होगी और इसके तहत 247-282 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण होगा.देश का यह अकेला एक्सप्रेसवे होगा जिसका निर्माण पूरी तरह बिहार की सीमा के अंदर होगा.यह सड़क हाजीपुर से आरंभ होकर पूर्णिया में समाप्त होगी और इसके वर्ष 2028 तक पूर्ण होने की संभावना जताई जा रही है. लिहाजा निर्माण के लिए भूमि-अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/प्रति घंटा की रफ्तार से वाहन दौड़ सकेंगे और पूर्णिया से पटना की दूरी महज 3 घंटे से कम समय में पूरी की जा सकेगी.गौरतलब है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद आरम्भ हो गई है. निर्माण के लिए अलाइनमेंट वर्ष 2025 में ही पूरा हो चुका है और अब भूमि-अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ हो रही है. इसके निर्माण के लिए 6 जिलों के 29 प्रखण्ड के 250 से अधिक गांवों में भूमि-अधिग्रहण किया जाना है.इसी क्रम में पूर्णिया जिला के बीकोठी,धमदाहा,केनगर, कसबा,पूर्णिया पूर्व और डगरुआ प्रखण्ड में लगभग 544 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है.जिला भू-अर्जन पदाधिकारी रंजीत कुमार के अनुसार ‘प्लॉट वेरिफिकेशन का आदेश दिया गया है.इसके बाद अधिगृहित की जाने वाली भूमि का गजट होगा.उसके बाद अन्य प्रक्रिया पूरी की जाएगी.इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण के बाद बिहार विकास की एक नई इबारत लिखेगा. सामरिक दृष्टि से भी ये काफी महत्वपूर्ण माना जाएगा.

