
पटना,संवाददाता 13 जुलाई। बिहार में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी लाने और उनके बेहतर स्वास्थ्य की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने नई फॉलो-अप व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार द्वारा सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों, जिला अस्पतालों और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जारी पत्र के अनुसार, एसएनसीयू एनबीएसयू और एनआईसीयू से डिस्चार्ज होने वाले प्रत्येक नवजात शिशु की अब अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी नियमित रूप से निगरानी की जाएगी। इसका उद्देश्य समय रहते स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है। निर्देश में कहा गया है कि नवजात शिशुओं के लिए दो स्तरों पर फॉलो-अप सुनिश्चित किया गया है। पहला सामुदायिक स्तर जिसके तहत आशा कार्यकर्ता एवं गृह आधारित नवजात देखभाल एचबीएनसी कार्यक्रम के माध्यम से निर्धारित समय पर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करेंगे। वहीं दूसरा स्वास्थ्य संस्थान स्तर होगा, जहां चिकित्सकों द्वारा तय समयावधि में बच्चों की नियमित जांच और आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों, मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के अधीक्षकों, जिला कार्यक्रम प्रबंधकों तथा संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। साथ ही फॉलो-अप से संबंधित सभी जानकारी का नियमित रिकॉर्ड रखने और मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से नवजात शिशुओं में गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान होगी,उपचार में देरी नहीं होगी और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में मदद मिलेगी। यह पहल विशेष रूप से उन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होगी,जिन्हें जन्म के बाद विशेष नवजात देखभाल इकाई में भर्ती रहना पड़ा था। राज्य स्वास्थ्य समिति ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित अधिकारी इस व्यवस्था का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करें, ताकि बिहार में नवजात शिशुओं को बेहतर और सतत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

