नई दिल्ली, 30 अगस्त (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति देते हुए केंद्र सरकार को चार हफ्ते के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।

स्वामी की याचिका में 19 जनवरी 2023 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख किया गया है। उस आदेश में केंद्र सरकार ने रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने के मामले में विचार जारी होने की बात कही थी। कोर्ट ने केंद्र को जल्द निर्णय लेने का निर्देश देते हुए स्वामी को यह अधिकार दिया था कि यदि वे संतुष्ट नहीं होते हैं, तो पुनः कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
स्वामी ने बताया कि 19 जनवरी 2023 के आदेश के बाद 27 जनवरी 2023 को केंद्र को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ एक प्रतिनिधित्व सौंपा गया था। इसके बाद 13 मई 2025 को एक और नया प्रतिनिधित्व दिया गया, लेकिन अब तक केंद्र या सुप्रीम कोर्ट को कोई जवाब नहीं मिला है। याचिका में मांग की गई है कि संस्कृति मंत्रालय स्वामी के प्रतिनिधित्व पर समयबद्ध और त्वरित निर्णय करे।
याचिका में यह भी कहा गया है कि रामसेतु केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। वैज्ञानिक और पुरातात्विक शोध इस बात का प्रमाण हैं कि यह एक मानव निर्मित संरचना है। रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग कई वर्षों से उठ रही है।
सुब्रमण्यम स्वामी ने 2007 में भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जो सेतु समुद्रम शिप चैनल परियोजना के खिलाफ थी। इस परियोजना में मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य को जोड़ने के लिए 83 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जानी थी, जिसके लिए समुद्र में बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग होनी थी। स्वामी का आरोप था कि इससे रामसेतु को नुकसान पहुंच सकता है।
रामसेतु, जिसे एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है, भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच चूने की चट्टानों की लगभग 30 मील लंबी चेन है। कहा जाता है कि 15वीं सदी तक इस संरचना पर चलकर रामेश्वरम से मन्नार द्वीप तक जाया जा सकता था, लेकिन बाद में तूफानों के कारण यह समुद्र में डूब गया। 1993 में नासा ने इसकी सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थीं, जिनमें इसे मानव निर्मित पुल बताया गया था।

