RTE से छूट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: अल्पसंख्यक संस्थानों को बाहर रखने के 2014 के फैसले की समीक्षा के लिए भेजा गया मामला

नई दिल्ली, 2 सितंबर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के दायरे से बाहर रखने के 2014 के फैसले पर गंभीर संदेह जताया है। कोर्ट ने इस फैसले की समीक्षा के लिए इसे वृहद संविधान पीठ के पास भेज दिया है। यह कदम शिक्षा के सार्वभौमिक अधिकार और गुणवत्ता को लेकर कोर्ट की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।


दरअसल, 2014 में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक संस्थान RTE कानून के दायरे में नहीं आते। लेकिन अब जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा है कि यह फैसला गुणवत्तापूर्ण सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा की बुनियाद को कमजोर करता है और इसके दूरगामी नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
पीठ ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट और अन्य प्रस्तुत सामग्रियों का हवाला देते हुए कहा कि इस छूट ने दुरुपयोग की जमीन तैयार कर दी है। पीठ ने लिखा, “हम अत्यंत विनम्रता से कहना चाहते हैं कि प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट बनाम भारत सरकार मामले में 2014 का फैसला अनजाने में ही सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा की नींव को खतरे में डालता है।”
अदालत ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों को RTE से छूट देने से समान शिक्षा के विचार और अनुच्छेद 21A की समावेशिता व सार्वभौमिकता** कमजोर होती है। अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि RTE कानून केवल शिक्षा का अधिकार नहीं, बल्कि बच्चों को मूलभूत सुविधाएं जैसे प्रशिक्षित शिक्षक, किताबें, यूनिफॉर्म और मिड-डे मील सुनिश्चित करता है। लेकिन RTE से बाहर रखे गए कई अल्पसंख्यक स्कूल इन जरूरी सुविधाओं को देने के लिए बाध्य नहीं होते।
पीठ ने कहा, “कुछ अल्पसंख्यक स्कूल तो RTE के मानकों का पालन करते हैं, लेकिन बहुत से ऐसे नहीं करते जिससे छात्रों को शिक्षा के बुनियादी अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है।”
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि RTE कानून के अंतर्गत शिक्षण संस्थानों को समान पाठ्यक्रम और शैक्षणिक दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है, जिससे संवैधानिक मूल्यों पर आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित होती है। लेकिन अल्पसंख्यक संस्थानों को इससे मुक्त रखने पर छात्रों और अभिभावकों में शैक्षणिक असमानता और अनिश्चितता बढ़ती है।
पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “RTE से छूट देने की यह स्थिति साझा शिक्षण स्थलों की परिवर्तनकारी शक्ति को कमजोर करती है और बच्चों को एकजुट करने की बजाय, उन्हें वर्ग, जाति, पंथ और समुदाय के आधार पर अलग कर देती है।”
कोर्ट ने चेताया कि यह छूट एक समतामूलक और एकजुट समाज की दिशा में बाधा बन सकती है। सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के नाम पर शुरू की गई यह व्यवस्था अब एक नियामकीय खामी बनती जा रही है, जिसका दुरुपयोग बढ़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला शिक्षा के अधिकार की सार्वभौमिकता और समानता को प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यह मामला वृहद संविधान पीठ में जाएगा, जो तय करेगी कि क्या 2014 का फैसला संवैधानिक मूल्यों और शिक्षा के सार्वभौमिक अधिकार के अनुरूप था या नहीं।

नई दिल्ली, 2 सितंबर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के दायरे से बाहर रखने के 2014 के फैसले पर गंभीर संदेह जताया है। कोर्ट ने इस फैसले की समीक्षा के लिए इसे वृहद संविधान पीठ के पास भेज दिया है। यह कदम शिक्षा के सार्वभौमिक अधिकार और गुणवत्ता को लेकर कोर्ट की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
दरअसल, 2014 में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक संस्थान RTE कानून के दायरे में नहीं आते। लेकिन अब जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा है कि यह फैसला गुणवत्तापूर्ण सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा की बुनियाद को कमजोर करता है और इसके दूरगामी नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
पीठ ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट और अन्य प्रस्तुत सामग्रियों का हवाला देते हुए कहा कि इस छूट ने दुरुपयोग की जमीन तैयार कर दी है। पीठ ने लिखा, “हम अत्यंत विनम्रता से कहना चाहते हैं कि प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट बनाम भारत सरकार मामले में 2014 का फैसला अनजाने में ही सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा की नींव को खतरे में डालता है।”
अदालत ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों को RTE से छूट देने से समान शिक्षा के विचार और अनुच्छेद 21A की समावेशिता व सार्वभौमिकता** कमजोर होती है। अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि RTE कानून केवल शिक्षा का अधिकार नहीं, बल्कि बच्चों को मूलभूत सुविधाएं जैसे प्रशिक्षित शिक्षक, किताबें, यूनिफॉर्म और मिड-डे मील सुनिश्चित करता है। लेकिन RTE से बाहर रखे गए कई अल्पसंख्यक स्कूल इन जरूरी सुविधाओं को देने के लिए बाध्य नहीं होते।
पीठ ने कहा, “कुछ अल्पसंख्यक स्कूल तो RTE के मानकों का पालन करते हैं, लेकिन बहुत से ऐसे नहीं करते जिससे छात्रों को शिक्षा के बुनियादी अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है।”
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि RTE कानून के अंतर्गत शिक्षण संस्थानों को समान पाठ्यक्रम और शैक्षणिक दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है, जिससे संवैधानिक मूल्यों पर आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित होती है। लेकिन अल्पसंख्यक संस्थानों को इससे मुक्त रखने पर छात्रों और अभिभावकों में शैक्षणिक असमानता और अनिश्चितता बढ़ती है।
पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “RTE से छूट देने की यह स्थिति साझा शिक्षण स्थलों की परिवर्तनकारी शक्ति को कमजोर करती है और बच्चों को एकजुट करने की बजाय, उन्हें वर्ग, जाति, पंथ और समुदाय के आधार पर अलग कर देती है।”
कोर्ट ने चेताया कि यह छूट एक समतामूलक और एकजुट समाज की दिशा में बाधा बन सकती है। सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के नाम पर शुरू की गई यह व्यवस्था अब एक नियामकीय खामी बनती जा रही है, जिसका दुरुपयोग बढ़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला शिक्षा के अधिकार की सार्वभौमिकता और समानता को प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यह मामला वृहद संविधान पीठ में जाएगा, जो तय करेगी कि क्या 2014 का फैसला संवैधानिक मूल्यों और शिक्षा के सार्वभौमिक अधिकार के अनुरूप था या नहीं।

More From Author

राजस्व महाभियान को लेकर कल्याणपुर अंचल के मुक्तापुर पंचायत में प्रथम शिविर का किया गया आयोजन

पटना में पर्यटन को मिलेगा नया आयाम: डबल डेकर बस सेवा की हुई शुरुआत, सौ रुपए में मिलेगा गंगा किनारे ऐतिहासिक स्थलों का नज़ारा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loader-image
Weather
Patna, IN
10:07 am, Mar 23, 2026
temperature icon 26°C
Mist
Humidity: 61 %
Pressure: 1013 mb
Wind: 3 mph
Wind Gust: 4 mph
Clouds: 0%
Visibility: 4 km
Sunrise: 5:51 am
Sunset: 6:02 pm
  • Temperature
  • Precipitation
  • Rain Chance
  • Wind
  • Humidity
  • Pressure
10:00 am
temperature icon
29°/31°°C 0 mm 0% 4 mph 26% 1012 mb 0 cm
1:00 pm
temperature icon
32°/33°°C 0 mm 0% 6 mph 20% 1008 mb 0 cm
4:00 pm
temperature icon
29°/33°°C 0 mm 0% 4 mph 22% 1008 mb 0 cm
7:00 pm
temperature icon
27°/28°°C 0 mm 0% 3 mph 29% 1009 mb 0 cm
12:00 am
temperature icon
25°/26°°C 0 mm 0% 3 mph 32% 1009 mb 0 cm
3:00 am
temperature icon
24°/25°°C 0.02 mm 42% 6 mph 36% 1008 mb 0 cm
6:00 am
temperature icon
24°/29°°C 0 mm 0% 3 mph 33% 1010 mb 0 cm
9:00 am
temperature icon
31°/34°°C 0 mm 0% 5 mph 24% 1010 mb 0 cm