नई दिल्ली, 3 सितम्बर (अशोक “अश्क”) पंजाब इन दिनों पिछले कई दशकों की सबसे विनाशकारी बाढ़ का सामना कर रहा है। राज्य सरकार ने मंगलवार को सभी 23 जिलों को बाढ़ प्रभावित घोषित किया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है और 3.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सतलुज, ब्यास और रवि नदियों के उफान और भरे हुए बांधों ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, कपूरथला, फिरोजपुर, तरनतारन और फाजिल्का सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं। 1,400 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। अकेले गुरदासपुर में 324, अमृतसर में 135 और होशियारपुर में 119 गांव जलमग्न हैं। 1.48 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बर्बाद हो चुकी है, जिससे विशेषकर धान की फसल को बड़ा नुकसान हुआ है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया। मान ने केंद्र से राहत मानकों में बढ़ोतरी और 60,000 करोड़ रुपये के लंबित फंड की मांग की है। उन्होंने कहा कि “हम भीख नहीं, अपने अधिकार मांग रहे हैं।”
बचाव कार्य जोरों पर हैं। NDRF की 23 टीमें, सेना, वायुसेना, नौसेना और BSF के जवान राहत कार्य में जुटे हैं। 114 नावों और एक राज्य हेलीकॉप्टर की मदद से अब तक 20,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। 174 राहत शिविरों में से 74 सक्रिय हैं, जहां 4,729 लोग शरण लिए हुए हैं।
पोंग और भाखड़ा बांध खतरे के निशान से ऊपर हैं। ब्यास नदी में 1.09 लाख क्यूसेक और रवि नदी में रिकॉर्ड 14.11 लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, नदियों की सफाई में लापरवाही और बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण इस त्रासदी के प्रमुख कारण हैं। मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों तक और बारिश की चेतावनी दी है। सरकार ने विशेष गिरदावरी का आदेश दिया है ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।

