पटना, 3 सितम्बर (अशोक “अश्क”) उत्तर बिहार में कोसी नदी एक बार फिर विनाश की धारा बन गई है। सुपौल जिले के सदर प्रखंड की बलवा पंचायत और किशनपुर प्रखंड की दुबियाही पंचायत में लगातार हो रहे कटाव से अब तक करीब 80 परिवारों के 100 से अधिक घर कोसी में समा चुके हैं। सोमवार रात को बलवा के लालगंज वार्ड-13 में अकेले 40 परिवारों के 60 घर नदी में विलीन हो गए।

कटाव के कारण सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया है, जिससे लोगों को घरों का सामान निकालने में भारी परेशानी हो रही है। दूसरी ओर, किशनपुर के बेलागोठ गांव में स्थिति और भी भयावह होती जा रही है। यहां वार्ड आठ पूरी तरह, जबकि वार्ड सात का तीन चौथाई हिस्सा कोसी की धारा में बह चुका है। अब वार्ड छह को भी नदी निगलने पर आमादा है।
बीते 24 घंटों में तीन दर्जन से ज्यादा घर नदी में समा चुके हैं। लोग अपना बसेरा छोड़कर ऊंचे व सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। सुपौल के डीएम ने बताया कि प्रभावितों के लिए सामुदायिक किचन की व्यवस्था की गई है और राहत कार्य जारी हैं।
इधर दरभंगा जिले में भी कोसी के जलस्तर में वृद्धि से किरतपुर अंचल के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गांवों के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। भंडरिया गांव के निवासी रंजीत यादव ने बताया कि गांव चारों तरफ से पानी से घिर चुका है, और नाव की कमी के कारण लोग घरों में फंसे हुए हैं।
भंडरिया-कदवारा और भंडरिया-रघुनाथपुर सड़कों पर पानी की तेज धारा बह रही है। सबसे बुरा हाल ढाका भलुआहा गांव का है, जहां कोसी के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। बनरी, लक्ष्मीनियां, बेलाही, चकला जैसे गांवों के लोग माल-मवेशियों के साथ तटबंधों पर शरण ले रहे हैं और झोपड़ियां खड़ी कर रहे हैं।
इसके बाद इधर, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर में भी दोबारा बाढ़ का पानी घुस आया है। सीनेट हॉल, नया बाजार सखीचंद घाट और बूढ़ानाथ क्षेत्र में भी पानी भर गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
कोसी के उफान और कटाव से प्रभावित इलाकों में हजारों लोगों की जिंदगी खतरे में है। प्रशासन की ओर से राहत कार्य जारी हैं, लेकिन हालात अभी नियंत्रण से बाहर हैं। स्थानीय लोग सरकार से जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

