नई दिल्ली, 6 सितंबर (अशोक “अश्क”) भारत की प्रमुख बिजनेस सर्विस कंपनी SIS लिमिटेड देश की प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री में अब तक की सबसे बड़ी डील करने जा रही है। बिहार की राजधानी पटना से जुड़ी यह कंपनी APS ग्रुप को करीब 600-650 करोड़ रुपये में खरीदने वाली है। यह अधिग्रहण देश के सिक्योरिटी सेक्टर में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह डील कई चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में SIS, APS ग्रुप की 51% हिस्सेदारी खरीदेगी, जबकि शेष 49% हिस्सेदारी अगले तीन वर्षों में कंपनी के प्रदर्शन से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने के बाद अधिग्रहित की जाएगी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का प्राइवेट सिक्योरिटी बाजार 1 लाख करोड़ रुपये का है और इसमें 50 लाख से ज्यादा लोग कार्यरत हैं। इस अधिग्रहण के बाद SIS में काम करने वालों की संख्या बढ़कर 3.5 लाख तक पहुंच जाएगी, जिससे यह भारत की सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली कंपनियों में शामिल हो जाएगी।
APS ग्रुप, जो वर्तमान में प्राइवेट सिक्योरिटी सेक्टर में छठे स्थान पर है, एक निजी कंपनी है जिसके मालिक अनिल पुरी और उनका परिवार हैं। वित्त वर्ष 2025 में APS का रेवेन्यू 1,100 करोड़ रुपये रहा। इस अधिग्रहण से SIS को BFSI और लॉजिस्टिक्स जैसे अहम क्षेत्रों में तकनीकी दक्षता, पूंजी और विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। APS में वर्तमान में 40,000 कर्मचारी कार्यरत हैं।
SIS लिमिटेड केवल सिक्योरिटी ही नहीं, बल्कि फैसिलिटीज मैनेजमेंट और कैश लॉजिस्टिक्स सेवाओं में भी काम करती है। सफाई, टेक्निकल सर्विस, पेस्ट कंट्रोल जैसी सेवाएं यह DTSS, SMC, Rare Hospitality और PestX ब्रांड्स के तहत देती है। वहीं, SIS Prosegur Holdings और SIS कैश सर्विसेज के जरिए कैश इन ट्रांजिट, ATM कैशिंग और रिटेल कैश मैनेजमेंट की सेवाएं दी जाती हैं।
1974 में रवींद्र किशोर सिन्हा द्वारा स्थापित SIS की उपस्थिति भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और सिंगापु तक फैली है। कंपनी के पास भारत में 293 ब्रांच ऑफिस, 50 रीजनल ऑफिस और 29 ट्रेनिंग एकेडमी हैं। जून 2025 तक, इसकी 72.14% हिस्सेदारी सिन्हा फैमिली के पास है।
SIS का भारतीय बाजार में फिलहाल 5% हिस्सा है जबकि वैश्विक कंपनियों की हिस्सेदारी 10-15% है। Crisil की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री में 20,000 असंगठित कंपनियां हैं जो 65% बाजार पर कब्जा किए हुए हैं। लेकिन आने वाले समय में संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है क्योंकि नियामक सख्ती और न्यूनतम वेतन कानूनों के पालन पर सरकार का जोर बढ़ रहा है।
यह डील न केवल SIS की मार्केट पोजिशन को मजबूत करेगी, बल्कि भारतीय सिक्योरिटी सेक्टर के संगठनात्मक ढांचे को भी एक नई दिशा दे सकती है।

