गोपालगंज, 22 सितम्बर (मुन्ना राज) जिले के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना भक्ति और श्रद्धा के साथ की गई। सुबह से ही मां के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतार लगी रही। महिला व पुरुष दर्शनार्थी मंदिर परिसर में खड़े होकर मां के जयकारे के साथ अपनी बारी का इंतजार करते रहे। इस दौरान मंदिर परिसर से लेकर गर्भगृह तक लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से पदाधिकारी मंदिर परिसर की व्यवस्था पर नजर बनाए हुए थे।

थावे मंदिर और आसपास के इलाके में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस पदाधिकारी से लेकर दंडाधिकारी तक मंदिर परिसर में गश्त कर रहे थे। महिला श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े,इसके लिए महिला पुलिस भी तैनात की गई है। वही कई ऐसे श्रद्धालु गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन और पूजन कर श्रद्धा व भक्ति का परिचय दे रहे हैं

दरअसल जिले के सुप्रसिद्ध थावे भवानी की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। ऐतिहासिक व पौराणिक मान्यताओं को समेटे इसका इतिहास 16वीं सदी में चेरो वंश के समय का बताया जाता है। जिसे हथुआ राज के राजा द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया था। तब से लेकर आज तक यह मंदिर लोगो के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां सिर्फ उत्तर बिहार ही नही बल्कि उतर प्रदेश नेपाल समेत विभिन्न जिलों के श्रद्धालु आकर मां की पुजा अर्चना करते है। कहा जाता है कि यहां करीब हजारों साल पहले ही देवी प्रगट हुई थी और पिंडी के रूप में मौजूद थी तब से लेकर आज श्रद्धालु उनका पूजन किया जा रहा है।

बाद में देवी को भव्य रूप में विकसित किया गया था। साथ ही बगल में ही देवी के सच्चे भक्त रहषू का भी मंदिर है। मान्यता है कि श्रद्धालुओं को देवी दर्शन के बाद भक्त रहषू के मंदिर में भी जाना होता है। वरना देवी की पूजा अधूरी मानी जाती है। मंदिर के पुजारी के संजय पांडेय के अनुसार, यहां भक्त रहषू की पुकार पर देवी कामाख्या से थावे पहुंची थीं। इस दौरान वो रास्ते में कई जगहों पर विश्राम किया था जैसे आम्बे भवानी आमी घोड़ाघाट आदि में रुकते हुए मां यहां पहुंची थी।

