नई दिल्ली, 22 सितम्बर (अशोक “अश्क”) भारतीय नौसेना जल्द ही अपने इतिहास के सबसे बड़े युद्धपोत निर्माण प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी करने वाली है। यह प्रोजेक्ट चार बड़े लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD) युद्धपोतों के निर्माण से संबंधित है, जिनकी कुल लागत लगभग 80,000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इन युद्धपोतों के निर्माण से भारतीय नौसेना को समुद्र से किनारे तक लंबे समय तक ऑपरेशन चलाने की ताकत मिलेगी और समुद्री सुरक्षा में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

इन युद्धपोतों का एक खास फीचर यह होगा कि इनसे फिक्स्ड-विंग नेवल ड्रोन उड़ाए जा सकेंगे, जो कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के रूप में काम करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र से किनारे पर हमले को और भी सटीक और प्रभावी बनाना होगा। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, नौसेना के इस प्रस्ताव पर ऊपरी स्तर की बैठक में जल्द ही फैसला लिया जाएगा, जो भारत की रक्षा ताकत को और मजबूत करेगा।
इस युद्धपोत निर्माण प्रोजेक्ट में भारतीय शिपबिल्डर्स की अहम भूमिका होगी। प्रमुख भारतीय शिपयार्ड जैसे एलएंडटी, मझगांव डॉकयार्ड, कोचिन शिपयार्ड और हिंदुस्तान शिपबिल्डर्स लिमिटेड इस प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगे। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय कंपनियां जैसे नावांटिया, नेवल ग्रुप और फिनकैंटिएरी डिजाइन पार्टनर के रूप में शामिल होंगी।
यह प्रोजेक्ट भारतीय शिपबिल्डर्स के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि यह पूरी तरह भारत में निर्मित और एकीकृत जहाज होंगे। इससे न केवल भारतीय शिपबिल्डिंग उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे भारत की आत्मनिर्भरता और रक्षा उत्पादन क्षमता भी मजबूत होगी।
भारतीय नौसेना के इन युद्धपोतों में एयर डिफेंस सिस्टम से लेकर लंबी दूरी के एंटी-शिप मिसाइल और ड्रोन तक की ताकत होगी। इन युद्धपोतों का प्रमुख उद्देश्य समुद्र से किनारे पर सैनिकों को उतारना और हमले करना होगा। इससे भारतीय नौसेना की एम्फीबियस वारफेयर क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।
नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि इन युद्धपोतों को ऐसे डिज़ाइन किया जाएगा कि वे हवा से होने वाले खतरों से खुद को बचाने में सक्षम हों। यह भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने के साथ-साथ उसकी रणनीतिक ताकत को भी नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
नौसेना ने 2021 में LPD प्रोजेक्ट के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन जारी की थी, और अब यह प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में है। LPD युद्धपोतों का निर्माण भारतीय नौसेना की सशस्त्र बलों के लिए एक निर्णायक कदम होगा, जिससे न केवल समुद्र में बल्कि किनारे पर भी ऑपरेशंस में दक्षता में वृद्धि होगी।
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से भारतीय नौसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा होगा और यह समुद्री रक्षा को न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रभावी बनाएगा। इस परियोजना के जरिए भारत अपनी समुद्री और रक्षा रणनीतियों को नई दिशा देने में सक्षम होगा।
इस समय, भारतीय नौसेना अपनी एम्फीबियस वारफेयर क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रही है, और ये चार लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक युद्धपोत इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।

