सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: निःसंतान विधवा की संपत्ति ससुराल को मिलेगी, मायके को नहीं

नई दिल्ली, 25 सितम्बर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act – HSA) की धारा 15(1)(b) पर सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि निःसंतान हिंदू विधवा की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति उसके मायके के बजाय ससुराल वालों को मिलेगी। कोर्ट ने कहा कि यह परंपरा हिंदू विवाह की सदियों पुरानी व्यवस्था पर आधारित है, जिसमें विवाह के बाद महिला का गोत्र बदलकर पति के गोत्र में सम्मिलित हो जाता है।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, जो सुप्रीम कोर्ट की एकमात्र महिला जज हैं, ने कहा कि हिंदू समाज में ‘कन्यादान’ और ‘गोत्रदान’ की परंपरा है। विवाह के समय महिला का गोत्र बदला जाता है और वह अपने पति और उसके परिवार की जिम्मेदारी में आती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और अदालत इसका सम्मान करती है।


कोर्ट में यह मुद्दा एक ऐसे मामले से जुड़ा है जिसमें एक युवा दंपति की कोविड-19 के दौरान मृत्यु हो गई। चूंकि दंपति निःसंतान थे और महिला ने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी, ऐसे में उसकी संपत्ति को लेकर महिला की मां और पुरुष की मां के बीच कानूनी विवाद उत्पन्न हो गया। पुरुष की मां का कहना है कि संपत्ति उन्हें मिलनी चाहिए, जबकि महिला की मां अपनी बेटी की कमाई और संपत्ति पर अधिकार जता रही हैं।
इसी तरह के एक अन्य मामले में निःसंतान दंपति की मृत्यु के बाद पुरुष की बहन ने संपत्ति पर दावा किया है। इन मामलों को जनहित का विषय बताते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।
न्यायमूर्ति नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकीलों से कड़े सवाल किए और स्पष्ट किया कि विवाह के पश्चात महिला अपने पति के परिवार का हिस्सा बन जाती है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, “एक विवाहित महिला अपने भाई के खिलाफ भरण-पोषण का दावा नहीं करती, विशेषकर दक्षिण भारत में तो विवाह के समय ही यह साफ कर दिया जाता है कि महिला अब एक नए गोत्र की सदस्य है।”
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला यदि चाहें तो वसीयत के जरिए अपनी संपत्ति का बंटवारा कर सकती हैं या पुनः विवाह कर सकती हैं। लेकिन यदि निःसंतान विधवा बिना वसीयत के मृत्यु को प्राप्त होती है और उसने पुनर्विवाह नहीं किया है, तो HSA की धारा 15(1)(b) के अनुसार उसकी संपत्ति उसके पति के वारिसों को ही जाएगी।
कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले को मध्यस्थता के लिए भेजते हुए नवंबर तक सुनवाई स्थगित कर दी है, और धारा की वैधता पर विस्तृत विचार के संकेत दिए हैं।

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