नई दिल्ली, 29 सितम्बर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने के अपने फैसले का दृढ़ता से बचाव किया। उन्होंने ट्रंप की सराहना करते हुए कहा कि उनके निर्णायक नेतृत्व और कूटनीतिक हस्तक्षेप ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को कम किया और पूरे दक्षिण एशिया को एक संभावित युद्ध से बचा लिया।

शहबाज शरीफ ने लंदन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई में बढ़े तनाव को शांत कर इस क्षेत्र को भारी तबाही से बचाया। अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो परिणाम और भी विनाशकारी हो सकते थे।”
गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने जून 2025 में डोनाल्ड ट्रंप को औपचारिक रूप से 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया था। शहबाज शरीफ ने कहा कि ट्रंप की भूमिका केवल भारत-पाकिस्तान संघर्ष तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने इथियोपिया-इजिप्ट विवाद और यूक्रेन संकट में भी सकारात्मक भूमिका निभाई।
हालांकि, भारत ने डोनाल्ड ट्रंप की इस भूमिका को सिरे से खारिज किया है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि मई में युद्धविराम के पीछे अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की ओर से डीजीएमओ को कॉल आने के बाद ही युद्धविराम पर सहमति बनी, क्योंकि भारत ने अपने सैन्य उद्देश्य पहले ही प्राप्त कर लिए थे।
इसके बावजूद, शहबाज शरीफ ने ट्रंप की वैश्विक कूटनीति की तारीफ करते हुए कहा, “ट्रंप का योगदान सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, उन्होंने सक्रिय रूप से बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए विवादों को नियंत्रित किया।”
शरीफ ने अंत में कहा कि ट्रंप की पहल और हस्तक्षेप ने न सिर्फ भारत-पाकिस्तान संकट को टालने में मदद की, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। यही कारण है कि पाकिस्तान ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया है।

