गोपालगंज, 30सितम्बर (ऊषा मिश्रा) बिहार की राजनीति में बरौली की अहमियत रही है। पहले मुस्लिम मुख्यमंत्री के रूप में अब्दुल गफूर अपनी सेवा दे चुके हैं। जिले के साथ बरौली में भी चुनावी चहल-पहल शुरू है। चुनाव का बिगुल बजने से पूर्व संभावित लड़ाकों के नामों की चर्चा होनी शुरू हो गई है। महागठबंधन व एनडीए की चुनावी संभावनाओं पर भी बहस-मुबाहिस जारी है। इस सीट पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है। इसके पहले चुनाव में राजद को जीत मिली थी। लेकिन,इस बार सियासी सीन बदल रहा है। एनडीए और महागठबंधन के अलावा इस बार जन सुराज पार्टी उभरकर सामने आई, वहीं बसपा भी अपना दम दिखा रही है।

चुनावी समीकरण भी काफी हद तक बदल चुका है। लिहाजा अबकी चुनाव में जबरदस्त लड़ाई के आसार दिख रहे हैं। इस सीट से एक बार फिर वर्तमान विधायक रामप्रवेश राय का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि एनडीए व महागठबंधन दोनों की ओर से सीट के बंटवारे व उम्मीदवार को लेकर अभी कुछ स्पष्ट नहीं है। पूर्व मंत्री व भाजपा नेता रामप्रवेश राय के एक बार फिर इस सीट से चुनाव लड़ने का कयास लगाया जा रहा है। जानकारों की मानें तो जिले में सीटों के बंटवारे में पेंच फंसने पर जद यू व अन्य घटक दलों से अदला बदली की सूरत भी बन सकती है। बहरहाल,सीट व उम्मीदवार को लेकर किंतु-परंतु के बीच संभावित लड़ाके अपने सियासी आकाओं की लॉबिंग में शिद्दत से जुटे हुए हैं।
-आठ बार कांग्रेस और पांच बार भाजपा दर्ज कर चुकी है जीत
बरौली विधानसभा सीट पर 1952 स 1985 तक आठ बार कांग्रेस का कब्जा रहा। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में इस सीट पर पहली बार भाजपा अपना कब्जा जमाया। तब से 2020 तक पांच बार भाजपा चुनाव जीत चुकी है। जबकि 2015 में राजद को जीत मिली थी। भाजपा से रामप्रवेश राय जीतते रहे हैं। इस विधानसभा सीट अब तक आठ बार कांग्रेस, पांच बार भाजपा, एक-एक बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जनता दल और राजद तथा दो बार निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत का परचम लहराया है। पिछले चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार राम प्रवेश सिंह ने राजद के रेयाजुल हक राजू को पराजित किया था।
-बोले विधायक
सभी गांव में पक्की सड़क,बिजली की सुविधा मिली है। डिग्री कॉलेज का प्रस्ताव मंजुर हो गया है। विभाग जमीन की तलाश कर रहा है। जनता ने मौका दिया तो बाढ़ का स्थाई निदान, बरौली को अनुमंडल बनाना तथा उद्योग लगाने सहित बरौली के बेहतर भविष्य के लिए विकास के लिए प्रयास करूंगा।
रामप्रवेश राय, विधायक
बात विकास की हो रही है। लेकिन सच पूछिए तो बरौली में सड़क बिजली के अलावा कुछ खास विकास कहीं दिख नहीं रहा है। डिग्री कॉलेज, अनुमंडलीय कार्यालय, माकूल चिकित्सा सुविधा, इंजीनियरिंग, कृषि, स्नातकोत्तर की पढ़ाई की व्यवस्था आज तक नहीं हुई है। जनता ने मौका दिया तो रोजगार ओर शिक्षा परक विकास करूंगा।
रेयाजुल हक राजू, प्रतिद्वंदी राजद
पिछले पांच साल में हुए बदलाव
- एक दर्जन से अधिक ग्रामीण सड़क और पुल पुलिया का निर्माण
- तीन कृषि फीडर का निर्माण
- सारण तटबंध पर पीचिंग की शुरुआत
- मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत बरौली बाजार में बाईपास के रूप में सड़क के निर्माण को मंजूरी
- बरौली में आधुनिक अस्पताल भवन का निर्माण
इस बार चुनाव के मुख्य मुद्दे
- बरौली को अनुमंडल बनाने की मांग
- रतन सराय रेलवे स्टेशन पर सभी ट्रेनों का हो ठहराव
- इंजीनियरिंग और डिग्री कॉलेज की हो सुविधा
- किसानों को सही दाम पर खाद बीज की हो व्यवस्था
-औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो
वर्ष विधायक दल
1952-57 अब्दुल गफूर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1962 गोरख राय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967 बी राय स्वतंत्र
1969 बिजुल सिंह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
1972 ब्रजकिशोर नारायण सिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977-1980 अब्दुल गफूर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1985 अदनान खान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1990 ध्रुपनाथ चौधरी निर्दलीय
1995 मो. नेमतुल्लाह जनता दल
2000 रामप्रवेश राय भाजपा
2005 फरवरी रामप्रवेश राय भाजपा
2005 अक्टूबर रामप्रवेश राय भाजपा
2010 रामप्रवेश राय भाजपा
2015 मो.नेमतुल्लाह राजद
2020 रामप्रवेश राय भाजपा भाजपा
बरौली विधानसभा क्षेत्र
कुल मतदाता: 239638
पुरुष वोटर :126458
महिला वोटर: 113177
चौहदी
उत्तर: पूर्वी चंपारण
दक्षिण: बड़हरिया
पूर्व: बैकुंठपुर
पश्चिम: गोपालगंज, हथुआ
जीत-हार का अंतर
2010
प्रत्याशी प्राप्त मत
रामप्रवेश राय भाजपा: 45234 वोट
मो नेमतुल्लाह राजद: 34820 वोट
जीत का अंतर: 10414 वोट
2015
प्रत्याशी प्राप्त मत
मो नेमतुल्लाह राजद: 61690 वोट
रामप्रवेश राय भाजपा: 61186 वोट
जीत का अंतर: 504 वोट
2020
प्रत्याशी प्राप्त मत
रामप्रवेश राय भाजपा: 81956 वोट
रेयाजुल हक : 67801 वोट
जीत का अंतर: 14155 वोट

