नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को संवैधानिक करार देते हुए देशभर में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और उपयोग से जुड़े ऐतिहासिक सुधारों को मंजूरी दे दी है। अदालत के इस फैसले को वक्फ प्रबंधन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिनियम न केवल संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है, बल्कि यह वक्फ संस्थाओं के कानूनी, सामाजिक और आर्थिक ढांचे को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाता है। अदालत ने अधिनियम की सभी 48 धाराओं को बरकरार रखते हुए यह निर्देश दिया कि डिजिटलीकरण, जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देने वाले सभी सुधार पूरी तरह लागू किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने “उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ” की अस्पष्ट अवधारणा को निरस्त करने और अनिवार्य वक्फ पंजीकरण को वैध ठहराने के फैसले को बरकरार रखा है। इसका अर्थ है कि अब अपंजीकृत वक्फ दावों की कानूनी वैधता समाप्त हो गई है।
एक महत्वपूर्ण निर्णय में अदालत ने कहा कि विधिसम्मत प्रक्रिया के बिना किसी को वक्फ संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता। साथ ही, जनजातीय भूमि और विरासत स्थलों को स्पष्ट सुरक्षा प्रदान करते हुए कहा गया कि वक्फ के दावे संविधान और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा से ऊपर नहीं हो सकते।
फैसले में वक्फ बोर्डों की संरचना को भी संतुलित प्रतिनिधित्व के साथ स्वीकार किया गया है, जिसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों की भी सहभागिता सुनिश्चित की गई है। मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की नियुक्ति में लचीलेपन को भी न्यायसंगत ठहराया गया।
एक अन्य ऐतिहासिक निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ दावों पर सीमा अधिनियम (लिमिटेशन एक्ट) को लागू माना है, जिससे अनिश्चितकालीन मुकदमों पर रोक लगेगी। साथ ही, वक्फ-अल-औलाद के प्रावधानों को बनाए रखते हुए महिलाओं के अधिकारों को संविधान सम्मत मान्यता दी गई है।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है और कहा है कि अब उसका फोकस राष्ट्रीय वक्फ विकास निगम (NAWDCO) को सक्रिय करने पर रहेगा।
यह फैसला देश में वक्फ संपत्तियों को सशक्तिकरण का उपकरण बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

