गोपालगंज, 2 अक्टूबर (निज संवाददाता) विजयादशमी 1925 को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई। वही 26 दिसंबर 1925 को कानपुर में सीपीआई की स्थापना हुई। संघ अपनी स्थापना की सौंवी वर्षगांठ धूमधाम से मना रहा है। जबकि दुनिया के मजदूरों एक हो का नारा देने वाले कम्यूनिस्ट पार्टी की हालत दयनीय होती जा रही है।उक्त बातें गीता मानस मंदिर संघ के सचिव अधिवक्ता उपेंद्र नाथ उपाध्याय ने थावे के रामचंद्रपुर गांव में आयोजित संघ शताब्दी वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि संघ आज विश्व के सबसे बड़े संगठन के रूप में सुमार है तो संघ परिवार के विश्व हिंदू परिषद,भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विद्या भारती ,भारतीय जनता पार्टी जैसे संगठनों को भी विश्व का बड़ा संगठन होने का गौरव प्राप्त है।

संघ की स्थापना अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध संघर्षरत भारत में हुआ। वह समय था स्वामी विवेकानंद,राजा राममोहन राय,स्वामी दयानन्द सरस्वती, सुभाषचंद्र बोस,कांग्रेस के लाल बाल पाल महात्मा गांधी सरिके लोगों के संगठन का। संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार इन सभी के कार्यक्रम में सहभागी बन कर जेल जाकर अनुभव किया कि हिंदू समाज को संगठित किए बिना प्राप्त आजादी लंबे समय तक नहीं रह पाएगी। बहुत सोच विचार कर विजयादशमी के दिन उन्होंने हिंदुओं को सगठित एवं चरित्रवान बनाने के लिए संघ की स्थापना की। संघ के बढ़ते कदम से घबराए हुए कांग्रेसी प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1948 में गांधी हत्या के नाम पर प्रतिबन्ध लगाया तो प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1975 में देश को आपातकाल में झोंका और संघ पर प्रतिबंध लगाया,प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने बाबरी ढांचा ढ़हने पर संघ पर प्रतिबंध लगाया। इन सारे प्रतिबंधों को पार करते हुए संघ आज सौवा वर्ष मना रहा है। कारण की संघ की जड़े भारतीयता में है,देश प्रथम में है जबकि संघ विपक्षियों की जड़े अपने परिवार के विकास तक ही सीमित है। अपने स्वास्थ्य पूर्ति में संघ को बाधक समझ कर अनावश्यक रूप से संघ का विरोध करते रहते हैं और मुंहकी भी खाते रहते हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के पद से संघ के पूर्व प्रचारक,जेपी सेनानी व अवकाश प्राप्त शिक्षक पृथ्वी नाथ पांडेय ने कहा कि हम उन भाग्यशाली स्वयंसेवकों में है,जो अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर,कश्मीर से धारा 370 का समापन,पाकिस्तान को उसकी भाषामें उसके घर में घुसकर जवाब देना और संघ के सौ बरस पूरे होने पर दो-दो स्वयंसेवक प्रधानमंत्रियो को देखने का गौरव प्राप्त करने वाले है। केंद्र की मोदी सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा संघ शताब्दी वर्ष पर 100 रुपये का सिक्का एवं डाक टिकट निकालना प्रशंसा योग्य है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में ग्रामीण पप्पू श्रीवास्तव ने कहा कि संघ का निस्वार्थ सेवा ही समाज में उसे सर्व ग्राह्य बनाया है। आज देश को संघ से बहुत आशाएं हैं इसलिए संघ को और गति से कार्य करने की आवश्यकता है।

