नई दिल्ली, 2 अक्टूबर ,(अशोक “अश्क”) कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर विदेशी धरती पर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। इस बार उन्होंने कोलंबिया के ईआईए विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग छात्रों को संबोधित करते हुए भारत में लोकतंत्र पर कथित “हमले” की बात कही है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ा खतरा “लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला” है।

राहुल गांधी ने कहा कि भारत एक बहुधार्मिक, बहुभाषी और विविध सांस्कृतिक देश है, और ऐसे देश को चलाने के लिए एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था जरूरी है। लेकिन मौजूदा समय में उस व्यवस्था पर हर तरफ से हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत में संवाद की आवश्यकता है। विभिन्न धर्मों, भाषाओं और परंपराओं को जगह देने के लिए लोकतंत्र सबसे बेहतर तरीका है। लेकिन वर्तमान में उस पर व्यापक हमला हो रहा है।”
भाजपा ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी को “दुष्प्रचार का नेता” बताया और विदेशी मंचों पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी का बार-बार भारत को बदनाम करना उनके गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।
राहुल गांधी ने अपनी स्पीच में चीन और अमेरिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने चीन को अमेरिका का “घनिष्ठ साझेदार” बताया और कहा कि भारत बिल्कुल उस जगह खड़ा है, जहां वैश्विक ताकतें टकरा रही हैं। उन्होंने चीन की आर्थिक प्रगति को “गैर-लोकतांत्रिक माहौल” में हुआ उत्पादन बताया और कहा कि भारत को एक लोकतांत्रिक ढांचे में चीन से मुकाबला करने वाला मॉडल बनाना होगा।
रोजगार और अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए राहुल ने कहा कि भारत में आर्थिक विकास तो हो रहा है, लेकिन पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहे। उन्होंने अमेरिका में ट्रंप की राजनीति की तुलना भारत की बेरोजगारी से करते हुए कहा कि ध्रुवीकरण बेरोजगारों के बीच अधिक प्रभावी होता है।
राहुल गांधी ने माना कि भारत की संरचना चीन से बहुत जटिल है भारत विकेंद्रीकृत है और इसमें 16-17 भाषाएं, अनेक धर्म और परंपराएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत को इन विविधताओं को अपनाना होगा, न कि उन्हें दबाना।
राहुल ने अंत में कहा, “मुझे भारत की क्षमता पर पूरा भरोसा है, लेकिन अगर लोकतंत्र पर हमला होता रहा, तो यह क्षमता पूरी तरह सामने नहीं आ पाएगी।”

