नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक हफ्ते से जारी हिंसा और उग्र विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार अब बैकफुट पर नजर आ रही है। हालात संभालने के लिए सरकार ने जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएसी) से बातचीत शुरू की है, लेकिन शुरुआती प्रयासों के बावजूद बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
गुरुवार को इस्लामाबाद से भेजे गए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पीओके सरकार और जेएसी के नेताओं के साथ वार्ता की। हालांकि बैठक कुछ ही समय में रुक गई। जेएसी के नेता शौकत नवाज मीर ने स्पष्ट किया कि जब तक कम्युनिकेशन ब्लैकआउट समाप्त नहीं किया जाता और मोबाइल-इंटरनेट सेवाएं बहाल नहीं की जातीं, तब तक वार्ता संभव नहीं है।

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बातचीत शांतिपूर्ण माहौल में हुई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की बात सुनी है। पाकिस्तान सरकार ने कहा कि वह पीओके के लोगों की “जायज मांगों” के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और टकराव के बजाय संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पीओके में मौजूदा हालात काफी तनावपूर्ण हैं। जेएसी द्वारा बुलाई गई हड़ताल के चलते पूरा क्षेत्र ठप्प पड़ा है। जगह-जगह हिंसक झड़पें हुई हैं, जिनमें अब तक 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सुरक्षाबलों पर पथराव हुआ है, वहीं सुरक्षाकर्मियों द्वारा भीड़ पर गोली चलाने की घटनाएं सामने आई हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी पीओके की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुनिश्चित करे और संचार प्रतिबंधों को हटाए। पाकिस्तान के अपने ही मानवाधिकार संगठनों ने भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
इस बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादास्पद बयान सामने आया है। उन्होंने पीओके के लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, “आज आपके पास जो कुछ है, वह बहुत है।” साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की सभी जातीय सेनाओं ने कश्मीर के लिए खून बहाया है।
पीओके में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और अब निगाहें इस पर हैं कि क्या पाकिस्तान सरकार लोगों की मांगों को लेकर कोई ठोस कदम उठाती है या स्थिति और बिगड़ती है।

