नई दिल्ली, 3 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे नागरिक विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रहे। इस बीच पाकिस्तानी सेना और सरकार की साख लगातार गिरती जा रही है।

जहां एक ओर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के खिलाफ जनाक्रोश चरम पर है, वहीं प्रदर्शनकारी अब खुलेआम पाक सेना का मजाक उड़ा रहे हैं। हाल ही में सामने आए एक वीडियो ने पाक सेना की और भी किरकिरी कर दी है। इस वीडियो में विरोध स्थल पर पाकिस्तानी सेना की वर्दी, हेलमेट और ढाल जैसे सैन्य सामानों को सड़क किनारे लगी जाली पर लटकाकर महज 10-10 रुपये में बेचने की बात कही जा रही है।
वीडियो में लोग हंसते हुए कहते सुने जा सकते हैं “पाक सेना की इज्जत अब सिर्फ 10 रुपये की रह गई है।” यह दृश्य न केवल सेना की गिरती साख का प्रतीक है, बल्कि यह संकेत भी है कि लोग अब पाक सेना से डरने के बजाय उसे उपहास का पात्र बना रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की कुल 38 मांगें हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है:
PoK विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना,
ISI समर्थित मुस्लिम कॉन्फ्रेंस को आतंकी संगठन घोषित करना।
JAAC नेता शौकत नवाज मीर का कहना है कि लोगों को 70 सालों से उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि या तो सरकार मांगे माने या फिर गुस्साए लोगों के उग्र आंदोलन का सामना करे।
प्रदर्शन के दौरान हिंसा भी भड़क उठी। धीरकोट, कोटली और सेहंसा सहित कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। अब तक तीन पुलिसकर्मियों समेत 9 लोगों की मौत हो चुकी है।
172 पुलिसकर्मी और 50 से अधिक नागरिक घायल बताए जा रहे हैं।
सेहंसा में प्रदर्शनकारियों ने मौतों का बदला लेने के लिए पुलिस की वैन और बुलडोज़र को आग के हवाले कर दिया।
अरजा पुल पर नाकाबंदी कर दी गई है जिससे यातायात पूरी तरह बाधित है।
कोटली शहर बंद पड़ा है और व्यापार-परिवहन पूरी तरह ठप है।
इस संकट के बीच सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में अमेरिका दौरे पर गए मुनीर को पाक सांसद ऐमल वली खान ने ‘सेल्समैन’ तक कह दिया। अब पीओके में भी सेना की वर्दी और प्रतिष्ठा का इस तरह सरेआम मजाक उड़ाया जाना पाकिस्तान के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
पीओके में बढ़ती अस्थिरता से साफ है कि पाकिस्तान सरकार और सेना की पकड़ लगातार कमजोर हो रही है और वहां की जनता अब खुलकर बगावत के मूड में आ गई है।

