गोपालगंज, 3 अक्तूबर (निज संवाददाता) एक माह से चल रहे पितृपक्ष व नवरात्रि पर्व के समाप्त होते ही शहर के मांसाहारी बाजारों में रौनक लौट गई। एक माह बाद इस तरह की भीड़ साधु चौक पर स्थित मछली बाजार देखने को मिला। एक बार फिर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। नौ दिनों के उपवास और धार्मिक प्रतिबंधों के बाद मांसाहार के शौकीनों ने मछली की दुकानों का रुख किया,जिससे मांग में अचानक और जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। इस अप्रत्याशित वृद्धि के कारण बाजार में मछली के दाम आसमान छूने लगे हैं।

दरअसल नवरात्रि के दौरान अधिकांश लोग मांसाहार से परहेज करते हैं,जिसके चलते स्थानीय बाजार में मछली की बिक्री लगभग ठप हो गई थी। व्यापारी भी सीमित स्टॉक रखते हैं। लेकिन जैसे ही व्रत खत्म होते हैं, मांसाहार की मांग एकाएक कई गुना बढ़ गई। प्रमुख बाजारों और मछली मंडियों में सुबह से ही ग्राहकों की लंबी कतारें लग गईं। मांग में अचानक आई तेजी को देखते हुए मछली के रेट में भारी इजाफा हुआ है। सामान्य दिनों में जो मछली 250 से 300 प्रति किलोग्राम बिकती थी, उसकी कीमत आज 400 से 500 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। रेहू,कतला,कमलकाट अन्य लोकप्रिय मछलियों के दाम में सबसे ज्यादा उछाल आया है। यहां तक कि थोक मंडियों में भी दाम बढ़े जिसका सीधा असर खुदरा ग्राहकों पर पड़ रहा था । मछली विक्रेताओं का कहना है कि वे इस भीड़ का इंतजार कर रहे थे। एक विक्रेता ने बताया,नवरात्रि में धंधा बहुत ही मंदा था। लेकिन अब जबरदस्त बिक्री हो रही है। बाहर से भी मछली मंगवानी पड़ रही है, इसलिए कीमतों में थोड़ा इजाफा हुआ है। हलांकि,ग्राहकों का कहना है कि नौ दिनों के उपवास के दौर धार्मिक प्रतिबंधों के बाद मांसाहार की शुरुआत मछली से ही की जाती है। इस लिए मछली लेकर जा रहे है भले ही कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन त्योहार के बाद इतना तो चलता है। बता दें की नवरात्रि के दौरान मछली की खपत लगभग शून्य थी, जिससे अचानक मांग बढ़ने पर कीमतों में उछाल आना स्वाभाविक है। विक्रेताओं के चेहरे पर भी खुशी साफ दिखी,क्योंकि लंबे समय बाद उनका व्यवसाय जोरों पर लौटा है।

