नई दिल्ली, 4 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लंबे समय से जारी जनविरोध और अशांति को अब विराम मिल गया है। पाक सरकार और आवामी एक्शन कमिटी के बीच समझौता हो गया है, जिसके तहत सरकार ने प्रदर्शनकारियों की 38 में से 21 प्रमुख मांगों को मान लिया है। इससे क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी है और नागरिकों में राहत और संतोष की लहर दौड़ गई है।
समझौते के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए अगले तीन दिनों तक शोक जुलूस निकाले जाएंगे। वहीं, हिंसा में शामिल लोगों और जिम्मेदार अधिकारियों पर एंटी-टेररिज्म कानून के तहत कार्रवाई होगी। इसके साथ ही एक न्यायिक जांच आयोग भी गठित किया जाएगा।

मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिजनों को सरकारी कर्मचारियों के बराबर मुआवजा मिलेगा। साथ ही, प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को 20 दिनों में नौकरी दी जाएगी। गंभीर रूप से घायलों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
पीओके में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दो नए बोर्ड – इंटरमीडिएट और हायर सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड बनाए जाएंगे। मौजूदा बोर्डों को 30 दिनों में पाकिस्तान के सेंट्रल एजुकेशन बोर्ड से जोड़ा जाएगा। अब सभी शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले ओपन मेरिट के आधार पर होंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए हर जिले में सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें लगाई जाएंगी। इसके अलावा, हेल्थ कार्ड स्कीम के लिए 15 दिनों में फंड जारी किया जाएगा।
बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। सभी टीएचक्यू अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर और नर्सिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। 10 जिलों में पानी की आपूर्ति योजनाओं का अध्ययन किया जाएगा, वहीं डाडयाल की कॉलोनियों में जल स्कीम और ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी।
पीओके सरकार में मंत्रियों और सलाहकारों की संख्या 20 तक सीमित की जाएगी। पीओके गवर्नमेंट एक्ट को 90 दिनों में संशोधित किया जाएगा, जिससे यह 1990 के लोकल गवर्नमेंट एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुरूप बन सके।
1300 सीसी से ऊपर के वाहनों की ट्रांसपोर्ट पॉलिसी की समीक्षा हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार होगी।
रावलपिंडी और इस्लामाबाद में गिरफ्तार सभी पीओके प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाएगा।
मीरपुर में एयरपोर्ट योजना पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर 2019 के हाईकोर्ट फैसले को लागू किया जाएगा।
यह समझौता न केवल पीओके में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह साबित करता है कि जन आंदोलन के दबाव में सरकारें संवाद और समाधान का रास्ता चुन सकती है।

