नई दिल्ली, 8 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में शुमार टाटा समूह इस समय आंतरिक मतभेदों के संकट से जूझ रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व में गंभीर मतभेद उभर कर सामने आए हैं, जिनका असर समूह के संचालन पर पड़ सकता है।

मामला इतना गंभीर हो गया कि यह केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर एक अहम बैठक हुई, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा मौजूद थे। बैठक में सरकार ने सभी से ट्रस्ट में स्थिरता बहाल करने और मतभेदों को शांतिपूर्वक सुलझाने की अपील की।
सरकार को आशंका है कि ट्रस्टीज के बीच यह कलह टाटा संस और समूह की कंपनियों के संचालन को प्रभावित कर सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई भी कदम उठाया जाए जिससे टाटा समूह की स्थिरता बनी रहे और संचालन में किसी तरह की बाधा न आए। जरूरत पड़ने पर अस्थिरता फैलाने वाले ट्रस्टियों को हटाने का सुझाव भी दिया गया है।
बैठक के बाद चारों प्रतिनिधियों ने दिल्ली में एक संक्षिप्त आंतरिक चर्चा की और उसके बाद मुंबई लौट गए। माना जा रहा है कि ये सभी 9 अक्टूबर को रतन टाटा की पुण्यतिथि पर आयोजित दो दिवसीय स्मरण समारोह में शामिल होंगे।
गौरतलब है कि 1868 में स्थापित टाटा समूह आज आईटी से लेकर ऑटोमोबाइल, हॉस्पिटैलिटी और एविएशन तक हर क्षेत्र में देश का नेतृत्व करता है। ऐसे में समूह में स्थिरता बनाए रखना देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद अहम है।

