नई दिल्ली, 14 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थि,त देश का सबसे उन्नत और जटिल परमाणु रिएक्टर—प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर)—अब ईंधन भरने की अंतिम मंज़ूरी के करीब है।

यह विकास भारत के त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत का संकेत देता है।500 मेगावाट क्षमता वाला यह लिक्विड सोडियम-कूल्ड रिएक्टर यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करता है। इसकी विशेषता यह है कि यह न केवल खुद को ऊर्जा देता है, बल्कि अतिरिक्त ईंधन भी उत्पन्न करता है—इसीलिए इसे “ब्रीडर” रिएक्टर कहा जाता है। कोर के चारों ओर मौजूद यूरेनियम-238 “कम्बल” अधिक प्लूटोनियम उत्पन्न करता है, और भविष्य में थोरियम-232 से यूरेनियम-233 का उत्पादन भी किया जाएगा, जो तीसरे चरण के रिएक्टरों को शक्ति देगा।परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया की एक यांत्रिक समस्या का समाधान कर लिया गया है, और अब रिएक्टर को ईंधन भरने की औपचारिक मंज़ूरी का इंतजार है। यह प्रक्रिया स्वदेशी नवाचार का प्रतीक है, जिसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) द्वारा 2003 में शुरू किया गया था।पीएफबीआर की लागत शुरू में 5,677 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 6,840 करोड़ रुपये हो गई है। फिर भी, इसकी प्रति यूनिट बिजली लागत पारंपरिक संयंत्रों के समान है। यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत 200 से अधिक घरेलू उद्योगों की भागीदारी से पूर्णत: स्वदेशी रूप से विकसित की गई है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मार्च 2024 में निरीक्षण किए गए इस रिएक्टर के चालू होते ही भारत रूस के बाद वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश बन जाएगा। यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी छलांग है, बल्कि यह सतत विकास और दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में भी भारत का निर्णायक कदम है।

