
पटना, 15 अगस्त: बिहार में जमीन से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान और रिकॉर्ड को अद्यतन करने के लिए 16 अगस्त यानी कल से राज्यव्यापी राजस्व महाअभियान की शुरुआत की जा रही है। इस महाअभियान का उद्देश्य विशेष रूप से जमाबंदी को अपडेट करना, जमीन से संबंधित गलतियों में सुधार करना और नामांतरण की प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। महाअभियान के तहत राजस्व विभाग की टीम हर गांव और घर तक पहुंचेगी। वे लोगों को उनकी जमाबंदी की कॉपी और आवेदन फॉर्म उपलब्ध कराएंगे। साथ ही, टीम यह भी सुनिश्चित करेगी कि छूटी हुई जमाबंदियों को भी ऑनलाइन किया जा सके। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जहां लोग अपने दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा कर सकेंगे। राजस्व विभाग ने पहले ही लोगों को जरूरी दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके। अगर जमीन अब भी पूर्वजों के नाम पर दर्ज है और आप उसे अपने नाम कराना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही वंशावली प्रमाण पत्र और पूर्वज की जमाबंदी से संबंधित खाता, खेसरा, रकबा जैसी जानकारी भी फॉर्म में भरनी होगी। यदि पहले से डिजिटल जमाबंदी में कोई गलती है, जैसे नाम, खाता संख्या, खेसरा, रकबा या लगान की जानकारी में त्रुटि, तो लोग आवेदन देकर इन्हें ठीक करा सकेंगे। विभाग के अनुसार, यह प्रक्रिया पारदर्शी और जनहितकारी होगी। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ने एक प्रोत्साहन योजना भी शुरू की है। इसके तहत तीन स्तरों पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया जाएगा। अंचल स्तर सबसे अच्छा काम करने वाली तीन पंचायतों को चुना जाएगा, और वहां के अधिकारियों, कर्मचारियों व जनप्रतिनिधियों को पुरस्कार मिलेगा। जिला स्तर प्रत्येक जिले से तीन सर्वश्रेष्ठ अंचलों (ब्लॉक) को चयनित कर सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तर पूरे बिहार में सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन जिलों को राज्यस्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। राजस्व विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे आवश्यक दस्तावेज समय पर तैयार रखें और विभाग की टीम का सहयोग करें। इस अभियान से उत्तराधिकार, बंटवारे, नामांतरण और भू-रिकॉर्ड्स में पारदर्शिता आने की उम्मीद है, जिससे आने वाले समय में जमीन से जुड़ी कानूनी समस्याओं में भी कमी आएगी। राज्य सरकार ने इसे जनहित में क्रांतिकारी कदम बताया है और कहा है कि यह महाअभियान भविष्य में जमीन विवादों को काफी हद तक कम कर देगा।

