नई दिल्ली, 15 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के ICU और CCU (गहन चिकित्सा इकाई और कार्डियक केयर यूनिट) में मरीजों की सुरक्षा के लिए समान मानक तय करने के निर्देशों की अवहेलना पर कड़ा रुख अपनाते हुए 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अवमानना नोटिस जारी किया है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनके सिंह की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों या शीर्ष अधिकारियों को 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा और हलफनामे के जरिए जवाब देना होगा कि कोर्ट के आदेशों की अवहेलना क्यों की गई।

खंडपीठ ने कहा कि “अब बहानेबाजी नहीं चलेगी”। अधिकारियों को कोई भी पूर्व कार्यक्रम या जिम्मेदारी छोड़कर कोर्ट की सुनवाई को प्राथमिकता देनी होगी।
डिफॉल्टर सूची में अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, चंडीगढ़, पुडुचेरी और अन्य UT सहित कुल 28 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
यह मामला 2016 में एक जनहित याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें निजी अस्पतालों में चिकित्सा लापरवाही और गहन चिकित्सा इकाइयों में एक समान मानकों के अभाव की शिकायत की गई थी।
हालांकि 2024 में याचिका खारिज कर दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ICU/CCU के मानकीकरण की निगरानी जारी रखी। 5 अगस्त 2025 को कोर्ट ने सभी राज्यों को मसौदा मानक तैयार करने और सभी हितधारकों से राय लेकर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
फिर भी, 13 अक्टूबर तक कोर्ट ने पाया कि दो दर्जन से अधिक राज्य अपनी रिपोर्ट समय पर नहीं दे पाए या उन्होंने देरी से रिपोर्ट दी। कोर्ट ने इसे “न्यायालय की उदारता का दुरुपयोग” बताया।
कोर्ट ने इस मसले पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी, एमिकस क्यूरी करण भरिहोके और एम्स के प्रोफेसर डॉ. नितीश नाइक की तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति को उपलब्ध सामग्री के आधार पर मसौदा रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी। तब पूरे देश के शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारियों के सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होने की संभावना है।

