नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने हिरन का सींग रखने के आरोप में 10 महीने से भारत में फंसे भारतीय मूल के इतालवी नागरिक रॉकी अब्राहम को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए मामला रद्द किया और अब्राहम को इटली लौटने की अनुमति दे दी।

अब्राहम को 16 जनवरी 2025 को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था, जब कस्टम अधिकारियों ने उनके बैग से एक सींग बरामद किया, जिसे हिरन का सींग समझा गया। इस पर उनके खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया। वह दो सप्ताह जेल में रहे और फिर जमानत पर रिहा हुए, लेकिन उन पर देश छोड़ने पर रोक लगा दी गई।
हालांकि, अब्राहम के वकील विल्स मैथ्यूज ने कोर्ट में दलील दी कि वह सींग वास्तव में बारहसिंगा का था, जो भारत में संरक्षित पशु नहीं है और न ही उसके सींग वन्यजीव निषिद्ध सूची में आते हैं। इस दलील के समर्थन में फोरेंसिक रिपोर्ट भी पेश की गई।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि इस प्रकार की गलत सलाह और कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाती है। कोर्ट ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि अब्राहम चाहें तो सरकार से हर्जाने की मांग उचित मंच पर कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सख्त लहजे में चेताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के साथ इस तरह की अवैधानिक कार्रवाई न केवल अनुचित है बल्कि न्यायिक प्रणाली की छवि को भी प्रभावित करती है। अदालत ने अधिकारियों को इस तरह के मामलों में कार्रवाई से पहले कानूनी जानकारी और प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस फैसले से न केवल अब्राहम को न्याय मिला है, बल्कि यह आदेश भविष्य में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

