नई दिल्ली, 21 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) अमेरिका में रहने वाले हजारों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में लागू की गई $1 लाख (लगभग 88 लाख रुपये) की H-1B वीजा फीस को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसके तहत कई आवेदकों को इस भारी-भरकम शुल्क से छूट दी जाएगी।

यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने स्पष्ट किया है कि यह नई फीस उन पर लागू नहीं होगी जो पहले से अमेरिका में वैध वीजा पर रह रहे हैं, जैसे कि:
- मौजूदा H-1B वीजा धारक,
- F-1 स्टूडेंट वीजा से H-1B में कन्वर्जन करने वाले छात्र,
- L-1 इंट्रा-कंपनी ट्रांसफरी, जो अपनी ही कंपनी में अमेरिका आए हैं।
इसके अलावा, USCIS ने कहा है कि 21 सितंबर 2025 से पहले जमा किए गए किसी भी H-1B आवेदन पर यह नई फीस लागू नहीं होगी। साथ ही H-1B वीजा धारकों को अमेरिका के भीतर और बाहर यात्रा करने पर कोई रोक नहीं होगी, जिससे काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना आसान होगा।
ट्रंप प्रशासन द्वारा पिछले महीने यह भारी फीस लागू करने की घोषणा के बाद, भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी नियोक्ताओं में चिंता की लहर थी। लेकिन अब ये नई राहत भरी घोषणा न केवल आर्थिक बोझ को कम करती है, बल्कि H-1B वीजा धारकों के भविष्य और करियर में स्थिरता भी सुनिश्चित करती है।
गौरतलब है कि H-1B वीजा प्रोग्राम में भारतीय पेशेवरों की भागीदारी सबसे अधिक है। हर साल जारी होने वाले 85,000 नए वीजा में करीब 70% भारतीयों को मिलते हैं, जबकि चीन के हिस्से में केवल 11-12% आते हैं।
यह वीजा प्रोग्राम तकनीकी और उच्च दक्षता वाले पेशेवरों को तीन साल तक अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है, जिसे तीन साल और बढ़ाया जा सकता है।
इस फैसले से हजारों भारतीयों को राहत मिलेगी, जो अमेरिका में अपने करियर और भविष्य को लेकर असमंजस में थे।

