नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) बिहार का समस्तीपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और अध्यात्म का जीवंत प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इसी जिले के कर्पूरीग्राम में हैं, जिसने राजनीति के साथ-साथ सभ्यता की अनेक परतों को संजोए रखा है। मिथिला की भूमि पर स्थित समस्तीपुर धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत उदाहरण है, जो बिहार की प्राचीन विरासत को समझने का एक अनमोल अवसर देता है।
समस्तीपुर का अतीत गौरवशाली रहा है। यह कभी राजा जनक के विदेह राज्य का हिस्सा था। विदेह के पतन के बाद यह क्षेत्र वैशाली गणराज्य और बाद में मगध साम्राज्य में शामिल हुआ। इसे पारंपरिक रूप से मिथिलांचल का प्रवेश द्वार कहा जाता है, जो इसकी भाषाई और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। इसी धरती ने महान दार्शनिक उदयनाचार्य को जन्म दिया, जिनका जन्म शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गांव में हुआ था। उन्होंने न्याय और दर्शन के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया।

समस्तीपुर के प्रमुख तीर्थ और ऐतिहासिक स्थल:
खुदनेश्वर धाम:
यह धार्मिक स्थल सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। यहां भगवान शिव का शिवलिंग और मुस्लिम भक्त खुदनी बीबी की मजार एक ही गर्भगृह में स्थित है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों आस्था से पूजा करते हैं।
विद्यापति धाम:
मैथिली के महाकवि विद्यापति की निर्वाण स्थली। कहा जाता है, जब वे बीमार थे, तब गंगा ने अपनी धारा मोड़कर उनके आश्रम के पास से बहना शुरू किया था।
मंगलगढ़:
बौद्ध धर्म से जुड़ा स्थल, जहां भगवान बुद्ध ने स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर धर्मोपदेश दिए थे।
सिरौली मंदिर:
सरस्वती माता को समर्पित लगभग 400 वर्ष पुराना मंदिर जहां हर साल विशाल मेला आयोजित होता है।
कबीर मठ, रोसड़ा:
संत कबीर के अनुयायियों का प्रमुख केंद्र, जिसे उनके शिष्यों ने उनकी स्मृति में स्थापित किया था।
समस्तीपुर आज भी अतीत की उस महान धरोहर को सहेजे हुए है, जो बिहार की आत्मा को परिभाषित करती है।

