नई दिल्ली, 27 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) अभिनेता सलमान खान के एक सार्वजनिक मंच पर दिए बयान ने नया भू-राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग देश कह दिया, जिसके बाद खबरें आने लगीं कि पाकिस्तानी एजेंसियों ने उन्हें आतंकियों की वॉचलिस्ट में डाल दिया है। हालांकि इस बीच असली सवाल यह उठ रहा है कि अगर बलूचिस्तान सच में पाकिस्तान से अलग हो गया, तो इस्लामाबाद के पास क्या बचेगा?

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो देश के कुल भूभाग का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है, जबकि यहां की आबादी महज 1.3 करोड़ के आसपास है, यानी कुल जनसंख्या का करीब 6 फीसदी। यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहां गैस, कोयला, सोना और तांबे के बड़े भंडार हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को इन संसाधनों पर हक नहीं मिला। पाकिस्तान ने यहां की कई खदानों को चीन को लीज पर दे रखा है, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।
ईरान और अफगानिस्तान से सटे इस प्रांत की रणनीतिक अहमियत बेहद बड़ी है। यही इलाका पाकिस्तान को अरब सागर तक पहुंच देता है। यहां का ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) की रीढ़ है। अगर बलूचिस्तान अलग हो गया, तो पाकिस्तान अपनी समुद्री और सामरिक पहुंच दोनों खो देगा।
अलगाव की मांग कोई नई नहीं है। 1971 में बांग्लादेश के अलग होने के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने आंदोलन को गति दी। अब यह संघर्ष हिंसक रूप ले चुका है। बलूच विद्रोही चीनी परियोजनाओं और पाकिस्तानी सुरक्षा ठिकानों पर हमले करते रहते हैं।
अगर यह प्रांत पाकिस्तान से अलग हो गया तो देश का आकार लगभग आधा रह जाएगा। उसकी पश्चिमी सीमा असुरक्षित हो जाएगी और अरब सागर तक की पहुंच खत्म हो जाएगी। इससे पाकिस्तान की रक्षा, नौसैनिक शक्ति और खुफिया नेटवर्क कमजोर पड़ जाएगा।
आर्थिक रूप से भी यह झटका बहुत बड़ा होगा। पाकिस्तान की करीब 40 फीसदी गैस जरूरतें बलूचिस्तान से पूरी होती हैं। ग्वादर पोर्ट और चीन के अरबों डॉलर के निवेश भी प्रभावित होंगे। कुल मिलाकर, बलूचिस्तान के अलग होने से पाकिस्तान न केवल आर्थिक और सामरिक रूप से कमजोर पड़ेगा, बल्कि उसका अस्तित्व भी खतरे में आ जाएगा।

