नई दिल्ली, 30 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) भारतीय वायुसेना के लिए फाइटर जेट्स की कमी चिंता का विषय बनती जा रही है। इस समय वायुसेना के पास केवल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि न्यूनतम आवश्यकता 42 स्क्वाड्रन की है। यानी लगभग 13 स्क्वाड्रन यानी करीब 230 विमानों की कमी है। चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों से लगातार खतरे के बीच यह स्थिति गंभीर मानी जा रही है।

वायुसेना ने 2021 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से 84 स्वदेशी तेजस एमके1ए फाइटर जेट्स खरीदने का सौदा किया था, लेकिन 2025 के अंत तक भी एक भी विमान की आपूर्ति नहीं हुई है। एचएएल ने पहले इस साल डिलिवरी शुरू करने की बात कही थी, लेकिन अब रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रक्रिया मार्च 2026 तक टल सकती है।
विलंब की मुख्य वजह विमान में हथियार प्रणाली का सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बीवीआर मिसाइल अस्त्र एमके1 के परीक्षण में सॉफ्टवेयर असंगतता के कारण विफलता मिली। तेजस एमके1ए में लगाए गए AESA रडार और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट को मौजूदा सॉफ्टवेयर सपोर्ट नहीं कर रहा है।
इसके अलावा, अमेरिकी कंपनी GE से मिलने वाले F404 इंजन की सप्लाई में भी देरी हुई है। 99 इंजनों के सौदे के तहत अब तक एचएएल को 30 इंजन मिलने थे, लेकिन फिलहाल केवल चार ही मिले हैं। इससे उत्पादन रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।
एचएएल के सीएमडी के अनुसार, सभी दिक्कतें सॉफ्टवेयर से जुड़ी हैं, हार्डवेयर पूरी तरह सुरक्षित है। उनका कहना है कि शुरुआती तकनीकी चुनौतियां स्वदेशी प्रोजेक्ट्स में सामान्य हैं और इन्हें दूर करने के बाद उत्पादन गति पकड़ लेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार सॉफ्टवेयर स्थिर हो गया तो तेजस एमके1ए का बड़े पैमाने पर उत्पादन आसान हो जाएगा और वायुसेना की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

