नई दिल्ली, 31 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान के जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान, जिन्हें आम तौर पर “मौलाना डीजल” के नाम से भी जाना जाता है, ने पाकिस्तानी सेना की नीतियों पर जोरदार आलोचना की है। फजलुर रहमान ने विशेष रूप से अफ़ग़ानिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य अभियान को लेकर सेना की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना डीजल ने कहा कि पाकिस्तान “एक और आत्मघाती युद्ध नहीं झेल सकता।” उन्होंने 1971 के बांग्लादेश युद्ध और 1999 के कारगिल संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि इन युद्धों में पाकिस्तान की सेना द्वारा की गई लापरवाही ने देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई। फजलुर रहमान ने स्पष्ट किया कि सेना को सीमाओं पर युद्ध लड़ने की बजाय ख़ैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद, आर्थिक संकट और शासन की सुस्ती जैसी घरेलू चुनौतियों से निपटना चाहिए।
मौलाना डीजल ने कहा, “इस्लाम किसी मुस्लिम पड़ोसी के खिलाफ अन्यायपूर्ण आक्रमण को पसंद नहीं करता।” उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से अफ़ग़ानिस्तान के प्रति सेना की आक्रामक नीति को न केवल गैर-इस्लामी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी आत्मघाती बताता है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने सेना की जनता में भय पैदा करने की आदत की भी आलोचना की और इसे देश के स्थायित्व के लिए खतरा बताया।
विश्लेषकों का मानना है कि फजलुर रहमान के इस तरह के बयानों का उद्देश्य पाकिस्तानी सेना पर रणनीतिक दबाव डालना है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि भारतीय खुफिया विभाग इसे अफगान तालिबान के व्यापक मनोवैज्ञानिक प्रतिरोध का हिस्सा मानता है। उनके अनुसार, फजलुर रहमान जैसे मौलवी पाकिस्तान के आंतरिक युद्ध के आख्यान को कमजोर कर सकते हैं।
फजलुर रहमान की आलोचना केवल व्यक्तिगत नहीं है; पाकिस्तान में तालिबान और अन्य कट्टरपंथी समूहों के कई समर्थक भी हैं, जो देश की सैन्य नीतियों और विदेशी संघर्षों के प्रति अपने मत स्पष्ट रूप से प्रकट करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मौलाना डीजल की सक्रियता पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य रणनीतियों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

