नई दिल्ली, 01 नवम्बर (अशोक “अश्क”) एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 31 अक्टूबर को सदस्य देशों से व्यापार और निवेश बढ़ाने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि वे अमेरिका के प्रयास का हिस्सा न बनें, जो चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने की दिशा में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण कोरिया छोड़ने के बाद, शी इस सम्मेलन में एकमात्र वैश्विक महाशक्ति नेता बने। उद्घाटन सत्र में शी ने जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मेज़बान दक्षिण कोरिया के नेताओं व मंत्रियों से हाथ मिलाया और मुस्कुराते दिखे।

शी ने अपने संबोधन में कहा कि एशिया को एक-दूसरे से हाथ मिलाने की नीति पर टिके रहना चाहिए, न कि सप्लाई चेन तोड़ने की सोच पर। उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा फैक्ट्रियों को चीन से बाहर ले जाने के प्रयासों पर अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना चाहिए, उन्हें तोड़ना नहीं।”
व्यापारिक नेताओं के लिए पढ़े गए एक भाषण में शी ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए कहा कि APEC देशों को संरक्षणवाद और एकतरफा नीतियों का विरोध करना चाहिए और “दुनिया को जंगल के कानून की ओर लौटने से बचाना चाहिए।” हालांकि, अक्टूबर में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स पर नए निर्यात नियंत्रण प्रस्तावित किए थे, जिससे उसके वैश्विक दबदबे को और बढ़ावा मिला। ये खनिज सेमीकंडक्टर, बैटरी और जेट विमान निर्माण में अहम हैं।
शी की स्थिरता की सराहना ट्रंप ने की, लेकिन जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने उनसे मुलाकात में रेयर अर्थ निर्यात नियंत्रण, पूर्वी चीन सागर विवाद और हिरासत में लिए गए जापानी नागरिकों के मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा, “हमारे बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन इन्हीं मुद्दों पर खुलकर और सीधे बातचीत जरूरी है।”
शिखर सम्मेलन में शी का संदेश स्पष्ट था: एशिया को एकजुट रहना चाहिए और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाए रखना चाहिए, जबकि राजनीतिक और आर्थिक दबाव के बावजूद चीन अपनी स्थिति बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।

