नई दिल्ली, 10 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने 1 नवंबर (शनिवार) को अपने 20 साल से अधिक लंबे करियर के बाद रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया। 45 साल के बोपन्ना ने इंस्टाग्राम पर भावुक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि अब वे आधिकारिक रूप से अपना रैकेट टांग रहे हैं। उन्होंने लिखा, “एक अलविदा, लेकिन अंत नहीं।” बोपन्ना की यात्रा कूर्ग के छोटे शहर से शुरू हुई, जहां उन्होंने लकड़ी के ब्लॉक काटकर सर्व मजबूत किया, कॉफी के बागानों में दौड़कर स्टैमिना बनाई और टूटे कोर्ट्स पर सपने देखते हुए आज दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचे।

बोपन्ना ने अपने पोस्ट में कहा कि टेनिस उनके लिए केवल खेल नहीं रहा, बल्कि जीवन का उद्देश्य बन गया। उन्होंने लिखा कि इसने उन्हें हर मुश्किल में ताकत, धैर्य और विश्वास दिया। अपने माता-पिता, बहन रश्मि, पत्नी सुप्रिया और बेटी त्रिधा का आभार व्यक्त करते हुए बोपन्ना ने कहा कि उनके त्याग और अटूट विश्वास के कारण ही वे यहां तक पहुंच सके। उन्होंने अपने कोच, दोस्तों, साथी खिलाड़ियों और फैन्स का भी धन्यवाद किया। बोपन्ना ने पोस्ट में कहा, “मैं भले ही अब प्रतियोगिता से दूर हो रहा हूं, लेकिन टेनिस से मेरा रिश्ता खत्म नहीं हुआ। अब मैं इस खेल को कुछ लौटाना चाहता हूं ताकि छोटे शहरों के युवा यह विश्वास कर सकें कि कुछ भी संभव है।”
करियर की उपलब्धियों की बात करें तो बोपन्ना ने दो ग्रैंड स्लैम डबल्स खिताब जीते। उन्होंने 2017 में फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स में गैब्रिएला डाब्रोव्स्की के साथ जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2024 में ऑस्ट्रेलियन ओपन में मैथ्यू एब्डेन के साथ मेन्स डबल्स खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ बोपन्ना ग्रैंड स्लैम (ओपन एरा) जीतने वाले सबसे उम्रदराज पुरुष खिलाड़ी बन गए।
बोपन्ना का आखिरी टूर्नामेंट पेरिस मास्टर्स 2025 रहा, जिसमें उन्होंने अलेक्जेंडर बुब्लिक के साथ जोड़ी बनाई थी। राउंड ऑफ 32 में उन्हें जॉन पीयर्स और जेम्स ट्रेसी ने 5-7, 6-2, 10-8 से हराया।
रोहन बोपन्ना का करियर भारतीय टेनिस के लिए प्रेरणा और देश के छोटे शहरों के खिलाड़ियों के लिए मिसाल रहा। उनके अनुभव और योगदान से युवा खिलाड़ियों के लिए टेनिस की राह आसान हुई है।

