नई दिल्ली, 01 नवम्बर (अशोक “अश्क”) ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तानी AWACS विमान को मार गिराया, जिससे भारत ने एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। इस ऑपरेशन में एयर-टू-एयर मिसाइलों का निर्णायक रोल देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने पाकिस्तान को PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइलें दी थीं। पाकिस्तान ने ऑपरेशन में 10 PL-15 मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिनमें से नौ को भारत ने इंटरसेप्ट कर लिया, जबकि एक मिसाइल बिना खराब हुए जमीन पर गिर गई।

भारत अपने स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल Astra-3 का विकास कर रहा है, जिसे ‘गांडीव’ नाम दिया गया है। इसकी मारक क्षमता PL-15 मिसाइल से कहीं अधिक है, लेकिन यह अभी डेवलपमेंट फेज में है। भविष्य में लड़ाई और भी अधिक तकनीकी और जटिल होने वाली है, जिसमें एयर-टू-एयर मिसाइलों के साथ इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का भी व्यापक इस्तेमाल होगा।
चीन और पाकिस्तान जैसी परमाणु शक्तियों से घिरे भारत के लिए लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता बढ़ाना अब रणनीतिक जरूरत बन चुकी है। इसी कारण भारत अरबों डॉलर के निवेश से अपने लड़ाकू बेड़े को नई पीढ़ी की लॉन्ग-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों से लैस कर रहा है। ANI ने अज्ञात सूत्रों के हवाले बताया कि भारत यूरोपीय Meteor मिसाइलों की बड़ी खेप खरीदने की तैयारी में है, जिसकी कीमत लगभग 1,500 करोड़ बताई जा रही है। रक्षा मंत्रालय में प्रस्ताव अंतिम चरण में है और जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
Meteor मिसाइल में रैमजेट इंजन है और इसकी रेंज 200 किलोमीटर तक है। यह वायुसेना के 36 राफेल विमानों में लगी है और नौसेना के 26 राफेल मरीन जेट्स में भी लगाई जाएगी। दो-तरफ़ा डेटा लिंक की वजह से पायलट फ्लाइट के दौरान लक्ष्य बदल सकता है, जिससे दुश्मन के विमानों के लिए ‘नो एस्केप जोन’ बन जाता है।
रिटायर्ड पायलट विजयेन्द्र के ठाकुर ने कहा कि भारत को रूसी R-37M मिसाइल हर हाल में खरीदनी चाहिए। रूस ने Aero India 2025 में इसे पेश किया था, जिसकी रेंज 200-300 किलोमीटर तक है और यह AWACS, टैंकर और बमवर्षक विमानों को मारने के लिए डिजाइन की गई है। रूस और भारत इसके संयुक्त उत्पादन पर भी चर्चा कर रहे हैं।
इसके अलावा, स्वदेशी Astra मिसाइल प्रोग्राम तेजी से आगे बढ़ रहा है। Astra Mk-1 पहले से ऑपरेशनल है, Astra Mk-2 की रेंज 200 किलोमीटर से अधिक होगी और Astra Mk-3 (गांडीव) की रेंज 340 किलोमीटर से ज्यादा है। Meteor, Astra Mk-3 और R-37M के तैनात होने पर भारतीय वायुसेना की क्षमता एशिया में सबसे एडवांस होगी, जिससे स्ट्रैटेजिक डिटरेंस और नेटवर्क-सेंट्रिक हाई-टेक वायुशक्ति में भारी वृद्धि होगी।

