नयी दिल्ली, 02 नवम्बर (सेंट्रल डेस्क) बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य के बाहर भी चर्चाएं तेज हैं। विशेषज्ञों और प्रवासी हस्तियों का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल बिहार नहीं, बल्कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करेगा। 243 सीटों पर दो चरणों में मतदान 6 और 11 नवम्बर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवम्बर को की जाएगी।

दिल्ली हाई कोर्ट में भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल और वरिष्ठ अधिवक्ता कमल कांत झा ने कहा कि “बिहार की जनता विकास की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक बार फिर राजग को चुनेगी।” उनका मानना है कि लालू-राबड़ी शासन के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में अपेक्षाकृत बेहतर काम हुआ है।
वहीं समाजसेवी अरविंद पाठक ने कहा कि “नीतीश कुमार ने कानून का शासन तो कायम किया, पर बाद के वर्षों में नौकरशाही और कमजोर नेतृत्व से उनकी साख प्रभावित हुई।” उन्होंने चुनाव के दौरान हुई हिंसक घटनाओं को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया।
समाजसेवी सुरेंद्र कुमार तिवारी ने नेताओं की बयानबाज़ी पर नाराज़गी जताई और कहा कि “मनोज तिवारी की खेसारी लाल पर टिप्पणी भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।”
शिक्षाविद डॉ. बी.एन. मिश्रा ने कहा कि “बिहार की जनता सदैव निर्णायक भूमिका निभाती रही है, और इस बार उसके पास तीसरा विकल्प भी मौजूद है।”

