नई दिल्ली, 05 नवम्बर (अशोक “अश्क”) अमेरिका में सरकारी कामकाज ठप होने का सिलसिला 36वें दिन में पहुंच गया है। यह अब तक का सबसे लंबा सरकारी शटडाउन बन गया है, जिसने लाखों अमेरिकियों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है। सरकारी कार्यक्रमों में कटौती, उड़ानों में देरी और कर्मचारियों की वेतनहीन स्थिति ने संकट गहरा दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट्स के बीच फंडिंग बिल (विनियोग विधेयक) को लेकर गतिरोध बना हुआ है।

अमेरिका में शटडाउन तब होता है जब कांग्रेस और राष्ट्रपति नए वित्तीय वर्ष के लिए सरकारी खर्च को मंजूरी देने वाले बिल पर सहमत नहीं हो पाते। इस बार विवाद सीमा सुरक्षा दीवार, स्वास्थ्य सेवा सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं के खर्च को लेकर है। कानूनन धन की कमी के कारण सरकार को “गैर-आवश्यक” सेवाएं बंद करनी पड़ती हैं, जबकि सुरक्षा जैसी “आवश्यक” सेवाएं सीमित कर्मचारियों के साथ चलती रहती हैं।
डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी जारी रखी जाए ताकि आम अमेरिकियों पर स्वास्थ्य खर्च का बोझ न बढ़े। वहीं कई रिपब्लिकन इसे आर्थिक बोझ बताते हैं। “अफोर्डेबल केयर एक्ट (ACA)” से जुड़ी सब्सिडी के खत्म होने की आशंका ने लाखों लोगों को चिंतित कर दिया है। उधर, खाद्य सहायता और बाल देखभाल जैसी योजनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
करीब आठ लाख संघीय कर्मचारी या तो फरलो (बिना वेतन छुट्टी) पर हैं या बिना वेतन के काम कर रहे हैं। परिवहन सचिव शॉन डफी ने चेतावनी दी है कि यदि एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों को वेतन नहीं मिला तो अगले हफ्ते हवाई यातायात में अराजकता फैल सकती है।
इस शटडाउन का असर भारत पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी दफ्तरों के बंद होने से H-1B वीजा, आव्रजन प्रक्रियाएं और व्यापारिक वार्ताएं प्रभावित हो सकती हैं। भारतीय आईटी सेक्टर और पेशेवरों को इसका सीधा झटका लग सकता है। एफडीए जैसी एजेंसियों के ठप होने से भारतीय दवा कंपनियों को अनुमोदन में देरी हो सकती है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता से वैश्विक निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है, जिससे भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। विदेशी निवेश (FII) में कमी और डॉलर की बढ़ती मांग से आर्थिक जोखिम और गहरा सकता है। साथ ही, अमेरिकी हवाई अड्डों पर बढ़ते विलंब से भारत-अमेरिका यात्रियों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

