नई दिल्ली, 05 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारत को घेरने की रणनीति के तहत बांग्लादेश अब पाकिस्तान के साथ एक खतरनाक गठबंधन की ओर बढ़ रहा है। यह गठबंधन न केवल 1971 के क्रूर नरसंहार की भयावह यादों को ताज़ा करता है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया को अस्थिर करने की साजिश भी रचता दिख रहा है। जिस बांग्लादेश को भारत ने पाकिस्तान की सेना के अत्याचारों से मुक्त कराया था, वही अब पाकिस्तान के साथ नई दोस्ती की पटकथा लिख रहा है।

पाकिस्तान नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ 8 नवंबर को ढाका की यात्रा पर जा रहे हैं। यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि भारत को अस्थिर करने वाली गहरी योजना का हिस्सा मानी जा रही है। न्यूज-18 के सीनियर पत्रकार मनोज गुप्ता के अनुसार, यह “गठबंधन” साझेदारी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की संप्रभुता और भारत की सुरक्षा पर प्रहार करने वाली साजिश है।
कुछ हफ्ते पहले पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन जनरल साहिर शमशाद मिर्जा भी चार दिन के दौरे पर ढाका पहुंचे थे। उन्होंने बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और सेना, नौसेना तथा वायुसेना प्रमुखों से उच्च-स्तरीय वार्ता की। यह बैठक सामान्य नहीं थी, बल्कि इसके पीछे ISI की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। मिर्जा की टीम में ISI के एक मेजर जनरल सहित आठ वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने बांग्लादेश के साथ संयुक्त खुफिया साझेदारी का प्रस्ताव रखा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ढाका स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में अब एक ISI सेल स्थापित की जाएगी, जिसमें एक ब्रिगेडियर, दो कर्नल, चार मेजर और तीनों सेनाओं के अधिकारी शामिल होंगे। यह कदम इस्लामाबाद को बांग्लादेश की NSI और DGFI जैसी एजेंसियों तक अभूतपूर्व पहुंच देगा।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तानी जिहादी, जिन्हें लंबे समय से राज्य प्रायोजित आतंकवादी माना जाता है, अब बांग्लादेश में सक्रिय दिख रहे हैं। हाफिज सईद के सहयोगी और लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा की सीमाओं पर भड़काऊ भाषण दे रहे हैं।
मनोज गुप्ता का कहना है कि पाकिस्तान ने “रणनीतिक गहराई” के नाम पर आतंक फैलाने की कला में महारत हासिल की है, और अब बांग्लादेश उसी राह पर बढ़ रहा है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पाकिस्तान से संबंध सुधारने के लिए तेजी से कदम उठा रही है — यह दशकों में पहली बार है जब ढाका-इस्लामाबाद इतने करीब आए हैं। भारत के लिए यह संकेत स्पष्ट है — उसके पूर्वी मोर्चे पर एक नई चुनौती खड़ी हो रही है।

