नई दिल्ली, 06 नवम्बर (अशोक “अश्क”) बुधवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश भूषण गवई ने मुंबई के बांद्रा (पूर्व) में बॉम्बे हाईकोर्ट के नए परिसर की आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नया भवन ‘‘न्याय का मंदिर होगा, न कि सात सितारा होटल।’ सीजेआई गवई ने ज़ोर दिया कि अदालत भवन किसी साम्राज्यवादी ढांचे का प्रतीक नहीं, बल्कि संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक होना चाहिए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायिक भवनों का निर्माण करते समय केवल न्यायाधीशों की नहीं, बल्कि नागरिकों—विशेष रूप से वादियों—की ज़रूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि 24 नवंबर को अपने कार्यकाल की समाप्ति से पहले यह उनकी महाराष्ट्र की आखिरी यात्रा है और वह राज्य के न्यायिक बुनियादी ढांचे से संतुष्ट हैं।
सीजेआई गवई ने कहा, “पहले मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने को लेकर हिचकिचा रहा था, लेकिन अब गर्व महसूस कर रहा हूं कि मैं बॉम्बे हाईकोर्ट—जहां से मेरा न्यायिक सफर शुरू हुआ—के नए भवन की नींव रखकर अपना कार्यकाल समाप्त कर रहा हूं।” उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका को संविधान के दायरे में रहकर समाज को न्याय प्रदान करना चाहिए।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि नया परिसर ऐतिहासिक बॉम्बे हाईकोर्ट भवन (1862 में निर्मित) का पूरक होगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुराने भवन का निर्माण मात्र 16,000 रुपये में पूरा हुआ था और उस समय 300 रुपये की बचत भी हुई थी।
फडणवीस ने वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर से आग्रह किया कि नया ढांचा भव्य तो हो, परंतु उसकी भव्यता लोकतांत्रिक रहे, साम्राज्यवादी नहीं। सीजेआई गवई ने इसे बॉम्बे हाईकोर्ट के इतिहास का एक “महत्वपूर्ण मील का पत्थर” बताया।

