नई दिल्ली, 06 नवम्बर (अशोक “अश्क”) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में बढ़ते वायु प्रदूषण और दम घोंटनेवाली हवा की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ता ल्यूक क्रिस्टोफर कॉउटिन्हो, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया मूवमेंट के वेलनेस चैंपियन रह चुके हैं, ने देशभर में “राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल” (National Health Emergency) लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रदूषण के गंभीर प्रभावों से लोगों को बचाने के लिए अब कठोर कदम उठाना आवश्यक है।
ल्यूक कॉउटिन्हो ने अपनी याचिका में कहा है कि सरकार द्वारा नीतिगत ढाँचा होने के बावजूद वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के ठोस निर्देश जारी करने की अपील की है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में बताया गया है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में PM₂.₅ और PM₁₀ कणों का स्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा तय मानकों से कहीं अधिक है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में PM₂.₅ का वार्षिक औसत स्तर 105 μg/m³ दर्ज किया गया है, जबकि कोलकाता में 33 μg/m³ और लखनऊ में 90 μg/m³ तक पहुँचा है। यह भारतीय मानकों के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सीमाओं का भी उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि ग्रामीण इलाकों में वायु गुणवत्ता निगरानी का अभाव एक बड़ी नीतिगत कमी है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश के 1.4 अरब नागरिक हर दिन जहरीली हवा में साँस ले रहे हैं। स्वास्थ्य और जीवनशैली विशेषज्ञ ल्यूक कॉउटिन्हो ने अपने अनुभव के आधार पर कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण अब केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी गंभीर मुद्दा बन चुका है।

