बक्सर, 8 नवंबर (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) के तहत किसानों की आय में वृद्धि और कृषि को टिकाऊ बनाने के लिए ठोस एवं व्यावहारिक कदम उठाए हैं। विश्वविद्यालय को किशनगंज, नवादा और बांका — बिहार के तीन आकांक्षी जिलों के लिए जिला कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

बीएयू के निदेशक (अनुसंधान) डॉ. अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम ने इन जिलों में मैदानी सर्वेक्षण, मिट्टी परीक्षण, संसाधन मानचित्रण, किसान परामर्श और तकनीकी विश्लेषण का कार्य प्रारंभ किया है। इन कार्य योजनाओं को शीघ्र ही राज्य स्तरीय पीएम-डीडीकेवाई प्रकोष्ठ को सौंपा जाएगा।
बीएयू ने इस योजना को केवल कागज़ी कार्य तक सीमित न रखते हुए इसे किसानों के खेतों तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया है। विश्वविद्यालय से जुड़े कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) के वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याओं और जरूरतों को समझ रहे हैं। वे वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण और संवाद के माध्यम से ऐसी योजनाएँ तैयार कर रहे हैं जो तुरंत लागू की जा सकें और किसानों को सीधा लाभ पहुँचाएं।
डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर है। हमारा लक्ष्य ऐसी जिला स्तरीय योजनाएँ बनाना है जो कृषक हितैषी, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और परिणाम-प्रधान हों।”
बीएयू सबौर इससे पहले भी कई फसलों की उन्नत प्रजातियाँ विकसित कर बिहार की कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय योगदान दे चुका है।

