समस्तीपुर, 10 नवम्बर(समस्तीपुर डेस्क) राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने समस्तीपुर जिले में एक नाबालिग बच्चे को चुनावी रैली में मंच पर लाए जाने की खबर पर गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने इसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन माना और जिले के डीएम को तीन दिनों में विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

एनसीपीसीआर ने बताया कि मामला एक समाचार पोर्टल की रिपोर्ट के माध्यम से संज्ञान में आया, जिसमें कहा गया था कि बच्चे को राजनीतिक प्रचार में शामिल किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक गतिविधि में बच्चों की भागीदारी बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2005 के उल्लंघन के साथ-साथ उनके मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए हानिकारक है।
जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित थाना प्रभारी व बाल संरक्षण इकाई को रिपोर्ट तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने वीडियो और समाचार रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया है।
एनसीपीसीआर ने कहा कि यदि बच्चे के साथ कोई शोषण या अनुचित व्यवहार हुआ तो यह बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 और पोस्को अधिनियम, 2012 के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा। नोटिस की प्रति राज्य के मुख्य सचिव, बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग और समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है। आयोग ने दोहराया कि बच्चों को किसी राजनीतिक, धार्मिक या वाणिज्यिक कार्यक्रमों में प्रचार का माध्यम बनाना पूरी तरह अनुचित है और उनके बचपन और शिक्षा के अधिकारों पर असर डालता है।

