नई दिल्ली, 12 नवम्बर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते इस समय गंभीर तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। तीन बार शांति वार्ता के प्रयास नाकाम होने के बाद अब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के साथ व्यापार और आवागमन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। यह आदेश अफगान सरकार के आर्थिक मामलों के उपप्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने जारी किया है।

बरादर ने अफगान व्यापारियों और उद्योगपतियों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत पाकिस्तान के स्थान पर वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों की तलाश करें। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार सीमा और व्यापारिक रास्ते बंद कर अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है और गैर-राजनीतिक मुद्दों को राजनीतिक हथियार बना रहा है।
बरादर ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान पर निर्भर व्यापारी भविष्य में किसी समस्या की स्थिति में तालिबान सरकार से मदद की उम्मीद न करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गरिमा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पाकिस्तान के साथ व्यापार न्यूनतम किया जाए। उन्होंने खासतौर पर पाकिस्तान से आने वाली दवाओं को निम्न गुणवत्ता वाली बताते हुए इनके आयात पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। अब दवाओं की खरीद अन्य देशों से की जाएगी।
पाकिस्तान में पहले से अनुबंधित व्यापारियों को तीन महीने की मोहलत दी गई है ताकि वे अपना कारोबार समेट सकें। यह फैसला अक्टूबर 2025 में सीमा पर हुई झड़पों के बाद लिया गया है, जिनमें दर्जनों लोग मारे गए थे। पाकिस्तान ने तब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को शरण देने का आरोप लगाकर सीमा और ट्रांजिट ट्रेड बंद कर दिया था।
तुर्की और कतर की मध्यस्थता में तीन दौर की वार्ता के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। इस बीच तोरखम और स्पिन बोल्डक जैसी प्रमुख सीमा चौकियां अब भी बंद हैं, जिससे अफगानिस्तान में वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं। तालिबान अब ईरान के चाबहार पोर्ट और अन्य वैकल्पिक मार्गों पर निर्भरता बढ़ाने की योजना बना रहा है।

