पटना (अशोक “अश्क”) राष्ट्रीय जनता दल से निष्कासित पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल के दस्तावेज सोमवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में जमा कर दिए। दस्तावेजों में पार्टी का पंजीकरण, वित्तीय खाते और अन्य जरूरी विवरण शामिल हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि तेज प्रताप अब स्वतंत्र सियासी पहचान के साथ अक्टूबर-नवंबर में संभावित बिहार विधानसभा चुनाव में पूरी तैयारी के साथ उतरने जा रहे हैं।

तेज प्रताप यादव ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर दस्तावेजों की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का अनुरोध किया। सूत्रों के मुताबिक, सीईओ कार्यालय की ओर से उन्हें आश्वस्त किया गया कि यह सामान्य प्रक्रिया है और निर्धारित समयसीमा के भीतर इसे पूरा कर लिया जाएगा।
तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल वर्ष 2020 में पंजीकृत हो चुकी थी। हालांकि यह अब तक गैर मान्यता प्राप्त पार्टी की श्रेणी में है। भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत, ऐसी पार्टियों को समय-समय पर अपने खर्च और अन्य दस्तावेज आयोग को सौंपने होते हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग ने 17 दलों को इसलिए सूची से हटा दिया क्योंकि उन्होंने पिछले छह वर्षों में कोई चुनाव नहीं लड़ा। वहीं, बिहार के 15 अन्य गैर मान्यता प्राप्त दलों को भी सीईओ कार्यालय ने नोटिस जारी किया है, हालांकि इस सूची में तेज प्रताप की पार्टी शामिल नहीं है।
इधर, आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर राज्य भर में 16 कोषांगों का गठन कर दिया गया है। इनमें शामिल हैं:
प्रशिक्षण कोषांग
कार्मिक कोषांग
ईवीएम कोषांग
वोटर हेल्पलाइन व शिकायत निवारण कोषांग
निर्वाचन व्यय अनुश्रवण कोषांग
आईटी एवं कंप्यूटर कोषांग
मीडिया व सोशल मीडिया कोषांग
आदर्श आचार संहिता कोषांग
सिक्युरिटी प्लान व भेद्यता मानचित्र कोषांग
बैलेट व पोस्टल बैलेट कोषांग आदि।
इन सभी कोषांगों के राज्यस्तरीय नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम बुधवार से पटना में शुरू किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग समय पर और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने को लेकर पूरी तरह से गंभीर है।
तेज प्रताप यादव की सक्रियता और निर्वाचन कार्यालय में दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को राजनीतिक विश्लेषक राजद से अलग होकर अपनी पार्टी को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। बिहार की सियासत में यह नया मोड़ दिलचस्प रहने वाला है।

