नई दिल्ली, 17 नवम्बर (अशोक “अश्क”) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक बाज़ार में हलचल मचा दी है। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर पहले ही 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का दबाव बना चुकी ट्रंप सरकार अब 500 प्रतिशत तक का दंडात्मक टैरिफ लगाने पर विचार कर रही है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 5 दिसंबर को भारत के दौरे पर आने वाले हैं, जहां पीएम नरेंद्र मोदी से ऊर्जा, रक्षा और व्यापार सहित कई अहम मुद्दों पर बातचीत होने वाली है।

भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है और अक्टूबर 2025 में देश ने रूस से 28,000 करोड़ रुपये से अधिक का कच्चा तेल आयात किया था। ऐसे में ट्रंप की नई घोषणा भारत के लिए सीधी चुनौती मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वे ऐसे कानून का समर्थन करते हैं, जिसके तहत रूस के साथ व्यापार जारी रखने वाले किसी भी देश पर “बहुत भारी प्रतिबंध” या 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि इस सूची में ईरान जैसे देश भी शामिल किए जा सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इतने ऊंचे टैरिफ का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना और उसे यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर करना है। रिपब्लिकन सांसद भी इसी दिशा में विधेयक तैयार कर रहे हैं, जिनमें रूस से व्यापार करने वाले देशों को सख्त आर्थिक दंड देने के प्रावधान शामिल होंगे।
भारतीय कूटनीति के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से सस्ता तेल भारत की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की बढ़ती नाराजगी व्यापारिक दबाव को नया रूप दे सकती है। अमेरिकी दबाव के चलते भारत की कुछ रिफाइनरियां पहले ही रूसी तेल से दूरी बनाने लगी हैं।
पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से पहले ट्रंप की यह बयानबाज़ी सामरिक समीकरणों को और जटिल बना रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 5 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली बैठक में दोनों देशों के बीच नौकरियों, हथियार प्रणालियों, ऊर्जा सहयोग और व्यापार पर होने वाली संभावित “मेगा डील” ट्रंप की टैरिफ नीति के बीच संतुलन का परीक्षण होगी।

