पटना (अशोक “अश्क”) बिहार की राजनीति में एक बार फिर विवाद की चिंगारी भड़क उठी है। इस बार मुद्दा है जननायक की उपाधि को लेकर। कांग्रेस नेताओं द्वारा राहुल गांधी को जननायक कहे जाने के बाद जदयू ने इस पर सख्त आपत्ति जताई है। जदयू सांसद संजय झा ने तीखा बयान देते हुए कहा कि जननायक की उपाधि चुराई नहीं जा सकती, यह सम्मान सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को दिया जा सकता है। संजय झा ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि चाहे राहुल गांधी कितनी भी कोशिश कर लें, जनता उन्हें जननायक के रूप में स्वीकार नहीं करेगी।

जदयू के इस विरोध के बाद कांग्रेस ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई। पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद मिश्रा ने साफ कहा कि राहुल गांधी आज के समय में जनता की आवाज़ हैं और वे ही सच्चे जननायक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस हमेशा से कर्पूरी ठाकुर का सम्मान करती रही है और उन्हें सामाजिक न्याय का प्रतीक मानती है।
प्रेमचंद मिश्रा ने जदयू और बीजेपी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि कर्पूरी ठाकुर को पद से हटाने में सबसे बड़ी भूमिका इन्हीं दलों की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री थे, तब इन्हीं पार्टियों के नेताओं ने उन्हें सदन में वोट के जरिए हटाया था। मिश्रा ने कहा कि आज वही लोग उनकी विरासत को भुनाने के लिए राजनीति कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव महज बयानबाजी नहीं, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा है। कांग्रेस चाहती है कि राहुल गांधी को जनता के मसीहा और जनता के नेता के तौर पर स्थापित किया जाए, वहीं जदयू अपनी राजनीति को कर्पूरी ठाकुर की विरासत और सामाजिक न्याय के प्रतीक के तौर पर बनाए रखना चाहती है।
बिहार की राजनीति में कर्पूरी ठाकुर का नाम सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्ग और गरीबों के अधिकारों के साथ जुड़ा रहा है। उन्हें जननायक की उपाधि इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पिछड़ों, दलितों और मजदूरों के हितों के लिए संघर्ष किया। ऐसे में राहुल गांधी को उसी उपाधि से जोड़ने की कोशिश जदयू को नागवार गुजरी है।
कांग्रेस ने अपने हमले में बीजेपी को भी नहीं छोड़ा। प्रेमचंद मिश्रा ने आरोप लगाया कि बीजेपी और जदयू दोनों मिलकर कर्पूरी ठाकुर को सत्ता से बेदखल करने के जिम्मेदार रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब ये दोनों दल सिर्फ चुनावी लाभ के लिए कर्पूरी ठाकुर के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने हमेशा उनका आदर किया है।
जननायक को लेकर उठे इस विवाद ने बिहार की सियासत को नई दिशा दे दी है। कांग्रेस जहां राहुल गांधी को इस उपाधि से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं जदयू इस पर रोक लगाने की हर कोशिश में जुट गई है।
इस टकराव ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में प्रतीकों की राजनीति, विरासत की लड़ाई और जनता के नायक कौन ये सवाल अहम बनेंगे। ऐसे में जननायक शब्द अब केवल सम्मान की उपाधि नहीं, बल्कि एक बड़ा चुनावी हथियार बन चुका है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और कितनी बयानबाजियां होंगी और यह विवाद किस दिशा में जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। मगर एक बात तय है कर्पूरी ठाकुर की विरासत और राहुल गांधी की छवि के इर्द-गिर्द बिहार की चुनावी राजनीति अब और भी तेज़ होने वाली है।

