पटना, 22 नवम्बर (पटना डेस्क) नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई कैबिनेट का गठन पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री को छोड़कर कुल 26 मंत्रियों को जगह दी गई है, जबकि सदन की संख्या के हिसाब से अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस प्रकार कैबिनेट में अभी नौ सीटें रिक्त हैं, जिन पर एनडीए विधायकों की निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि पहले विस्तार की कोई औपचारिक तिथि तय नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में उम्मीदों का दौर लगातार जारी है।

एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं, जिनमें से 22 को मंत्री पद मिला है। चार सदस्य विधान परिषद से हैं, जबकि रालोमो के दीपक प्रकाश को किसी सदन का सदस्य न होने के बावजूद मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। भाजपा ने इस बार अपने सात पुराने मंत्रियों को मौका नहीं दिया, वहीं जदयू ने किसी नए चेहरे को शामिल नहीं किया। रालोमो और लोजपा(र) के जिन तीन मंत्रियों को विभाग मिले हैं, वे पहले भाजपा के पास थे।
एनडीए में पुराने फार्मूले के अनुसार 20 पद भाजपा और 15 पद जदयू के हिस्से आते हैं, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। एक पद हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के पास है। यदि यह फार्मूला नहीं बदलता, तो शेष नौ में छह जदयू और तीन भाजपा को मिल सकते हैं। उधर कई वरिष्ठ मंत्रियों के पास दो से पांच विभाग हैं, जिनका पुनर्वितरण नए मंत्रियों के बीच होगा।
पिछली कैबिनेट की तुलना में भाजपा में ब्राह्मण और भूमिहार प्रतिनिधित्व घटा है। उम्मीद है कि अगले विस्तार में दोनों जातियों को अतिरिक्त जगह दी जा सकती है। साथ ही जदयू महागठबंधन से आने वाले संभावित ‘‘अतिथि विधायकों’’ पर भी नजर बनाए हुए है।

