नई दिल्ली (अशोक “अश्क”) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उल्लेख कर न केवल राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया, बल्कि स्वयं संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं के हृदय को भी भावविभोर कर दिया। इसके कुछ ही दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 16 वर्ष की आयु से संघ से जुड़े सीपी राधाकृष्णन को एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर एक बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है।

सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है और अगर ऐसा होता है तो यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा जब देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आरएसएस से जुड़े स्वयंसेवक विराजमान होंगे। संघ के एक वरिष्ठ लेखक और प्रोफेसर का कहना है कि 15 अगस्त को वे जब कार चला रहे थे और पीएम मोदी का भाषण सुन रहे थे, तो संघ का नाम सुनते ही उन्होंने गाड़ी रोककर तालियां बजाईं। उन्होंने कहा, संघ ने शायद ऐसी सार्वजनिक प्रशंसा की अपेक्षा भी नहीं की थी।
संघ को कई बार राजनीतिक और वैचारिक हमलों का सामना करना पड़ा है। तीन बार उसे समाप्त करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार संघ ने विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदलकर अपने सेवा कार्यों और संगठनात्मक विस्तार से खुद को मजबूत किया। वनवासी क्षेत्रों में पहुंचकर, आपदा राहत में अपनी भूमिका निभाकर संघ ने व्यापक जनसमर्थन अर्जित किया। लाल किले की प्राचीर से संघ का जिक्र करना न केवल संगठन को सम्मान देना था, बल्कि देश के जनमानस में उसकी भूमिका को स्वीकार करना भी था।
प्रधानमंत्री मोदी स्वयं संघ के पृष्ठभूमि से हैं। बीजेपी में सक्रिय राजनीति में आने से पहले वे संघ के प्रचारक रहे हैं। फिर संगठन में काम करते हुए वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने और आज तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री हैं। जानकारों का मानना है कि अब मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में संघ को गुरु दक्षिणा दे रहे हैं, और आने वाले दिनों में इससे भी बड़े निर्णय हो सकते हैं।
संघ से जुड़े व्यक्तियों का देश के शीर्ष पदों पर पहुंचना अब नई बात नहीं रह गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सभी संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं। अब जब सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति बनते हैं, तो वे इस पद पर पहुंचने वाले संघ के दूसरे व्यक्ति होंगे। इससे पहले वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति रह चुके हैं, जबकि भैरों सिंह शेखावत जनसंघ से आए थे।
संघ अब अपने शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर है। विजयदशमी से इसका 100वां वर्ष समारोह प्रारंभ होगा। यह वह अवसर होगा जब नागपुर में संघ का शीर्ष नेतृत्व स्वयंसेवकों को संबोधित करेगा और देशभर में संघ का साहित्य और विचार आमजन तक पहुंचाने का महाअभियान चलाया जाएगा।
संघ की योजना हर गांव, हर बस्ती तक पहुंचने की है और इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। ऐसे में जब उपराष्ट्रपति का चुनाव विजयदशमी से कुछ सप्ताह पहले हो रहा है, तो यह निश्चित ही संघ के 100 वर्ष पूरे होने के पूर्व एक बड़ा प्रतीकात्मक और रणनीतिक कदम है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल न केवल संघ की विचारधारा को सम्मान देने वाली है, बल्कि यह बताती है कि वे संगठन और सत्ता के संतुलन को किस तरह से एक सूत्र में पिरो रहे हैं।

