पटना, 22 नवम्बर (पटना डेस्क) बिहार की नवगठित नीतीश कैबिनेट में भले ही भाजपा ने दो उपमुख्यमंत्री समेत कुल 14 मंत्रियों के साथ सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व हासिल किया हो, लेकिन बजट बंटवारे में पार्टी काफी पीछे रह गई है। राज्य के वार्षिक बजट 3,16,895.02 करोड़ रुपये में भाजपा के हिस्से केवल 29.22 प्रतिशत बजट वाले विभाग आए हैं, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू के पास कुल 65.73 प्रतिशत बजट का नियंत्रण है। शेष विभागों में लोजपा(रामविलास) के दो मंत्रियों को 0.91 फीसदी, हम के एक मंत्री को 0.58 फीसदी और रालोमो के एक मंत्री को 3.56 प्रतिशत बजट से जुड़े विभाग दिए गए हैं।

जदयू कोटे से शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को सर्वाधिक 60,964.87 करोड़ रुपये का विभाग मिला है। वहीं भाजपा की ओर से स्वास्थ्य एवं विधि मंत्री मंगल पांडेय 20,035.80 करोड़ के स्वास्थ्य विभाग के साथ सबसे बड़े बजट वाले मंत्री हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास गृह विभाग है, जिसका बजट 17,831.21 करोड़ है।
जदयू के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार 16,093.46 करोड़ और मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ऊर्जा समेत पांच विभागों के बावजूद केवल 13,484.35 करोड़ के ऊर्जा विभाग पर निर्भर हैं। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के विभाग का आकार 7,451.15 करोड़ है।
रालोमो के दीपक प्रकाश को पंचायतीराज विभाग का 11,302.52 करोड़ का मजबूत बजट मिला है। भाजपा के नितिन नवीन के पास पथ निर्माण और नगर विकास मिलाकर 18,788.79 करोड़ रुपये का बजट है, जो पार्टी के लिए सबसे ‘मलाईदार’ संयोजन माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, संख्या में बड़ी लेकिन बजट में छोटी भूमिका के चलते भाजपा के कैबिनेट प्रभाव पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

