नई दिल्ली, 25 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारतीय मूल के वैश्विक स्टील उद्योगपति और ब्रिटेन के धनी निवासियों में शुमार लक्ष्मी एन. मित्तल ने तीन दशक बाद यूनाइटेड किंगडम छोड़ने का बड़ा निर्णय लिया है। अनुमानित 15.4 अरब पाउंड की संपत्ति के स्वामी मित्तल अब अपना स्थायी निवास स्विट्जरलैंड और दुबई में स्थापित कर रहे हैं। यह कदम ब्रिटेन में संभावित नई लेबर सरकार की कर नीतियों को लेकर बढ़ती आशंकाओं से जुड़ा है।

लेबर पार्टी ने सत्ता में आने पर अमीरों पर टैक्स बढ़ाने और विशेष तौर पर नॉन-डोमिसिल्ड टैक्स स्टेटस को समाप्त करने की योजना बनाई है। यह व्यवस्था पिछले दो शताब्दियों से उन निवासियों को विदेशी आय पर कर राहत देती थी, जिनका मूल घर यूके से बाहर होता है। व्यवस्था खत्म होने पर मित्तल जैसे अरबपतियों को अपनी वैश्विक आय पर भारी कर चुकाना पड़ता, विशेषकर विरासत कर (Inheritance Tax) सबसे बड़ी चिंता का कारण बना हुआ था।
इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए मित्तल ने ब्रिटिश वित्त मंत्री रेचल रीव्स के अगले बजट से पहले ही यूके छोड़ने का निर्णय ले लिया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपना टैक्स रेजिडेंस स्विट्जरलैंड में शिफ्ट कर दिया है, जबकि वह अपना अधिकांश समय दुबई में बिताएंगे। दुबई में उनके पास पहले से संपत्ति मौजूद है और हाल ही में उन्होंने एक लक्जरी रियल एस्टेट परियोजना में निवेश भी किया है।
स्विट्जरलैंड और दुबई—दोनों जगह विरासत कर नहीं लगता, जिससे मित्तल को अपनी 15 अरब पाउंड से अधिक की संपत्ति अगली पीढ़ी को टैक्स-फ्री स्थानांतरित करने का सुरक्षित मार्ग मिल जाता है। मित्तल का यह निर्णय न केवल व्यक्तिगत कर योजना, बल्कि ब्रिटेन की बदलती कर नीति को लेकर धनी वर्ग की बढ़ती चिंताओं को भी उजागर करता है।

