पटना, 29 नवम्बर (पटना डेस्क) दानापुर के पूर्व विधायक और राजद नेता रीतलाल यादव पर शिकंजा कसता जा रहा है। पटना पुलिस की ताज़ा जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पूर्व विधायक अपने इलाके में एक संगठित आपराधिक गिरोह संचालित करते हैं, जिसके सहारे उन्होंने करोड़ों की अवैध संपत्ति खड़ी कर ली। यह पूरी रिपोर्ट ईडी को सौंप दी गई है और अब प्रवर्तन निदेशालय उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करने की तैयारी में है। पुलिस रीतलाल और गिरोह के कई सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है।

जांच के दौरान पुलिस और एसआईटी ने अंचलाधिकारी कार्यालय से दस्तावेज खंगालते हुए पाया कि गिरोह ने दानापुर क्षेत्र में कई सरकारी जमीनों पर कब्जा कर अवैध निर्माण करा रखे थे। खगौल थाने में संगठित गिरोह के संचालन का केस दर्ज होने के बाद जब संपत्तियों की जांच शुरू हुई, तब इन अनियमितताओं का बड़ा खुलासा हुआ। रिपोर्ट में लिखा गया है कि अवैध कमाई का इस्तेमाल कर नवयुवकों को गुमराह कर उनसे अपराध करवाए जा रहे थे। सबसे बड़ा मामला कोथवां मौजा में सामने आया, जहां गिरोह ने तीन एकड़ गैर-मजरुआ सरकारी भूमि पर कब्जा कर उसे लगभग 4000 वर्गफीट की चहारदीवारी से घेर दिया था। रीतलाल ने अपने गांव कोथवां में पिता के नाम पर बनाया गया रामाशीष चौक भी इसी सरकारी जमीन पर होने का आरोप है। इलाके के लोग कथित तौर पर भय के कारण शिकायत दर्ज नहीं करा पा रहे थे। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि रीतलाल यादव अपने सहयोगियों—टिंकू, विनोद, श्रवण, चिकू, मंटू, सुनील, सन्नी समेत कई अन्य—के जरिए जमीन मालिकों और बिल्डरों से रंगदारी और धमकियों के बल पर वसूली करते थे। बिल्डर कुमार गौरव से 50 लाख की रंगदारी मांगने के मामले में रीतलाल व उनके भाई पहले से जेल में बंद हैं। मुस्तफापुर मौजा में 76 डिसमिल जमीन पर दबंगई से बनाई गई 16 अवैध दुकानों को भी पुलिस ने चिन्हित किया था, जिन्हें जिला प्रशासन ने 15 मई 2025 को कब्जामुक्त कराया।

